पटना, अंग भारत। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 (TRE-4) के इंतजार में बैठे हजारों अभ्यर्थियों का सब्र आखिरकार शुक्रवार को पटना की सड़कों पर उबाल बनकर फूट पड़ा। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सड़कों पर दौड़ते पुलिसकर्मियों और बचाव के लिए भागते छात्रों के बीच मची अफरातफरी ने शिक्षा व्यवस्था की विसंगतियों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की हताशा का नतीजा है जो महीनों से भर्ती कैलेंडर का पालन न होने से परेशान हैं।
प्रदर्शन की शुरुआत और लाठीचार्ज
शुक्रवार की सुबह लगभग 10 बजे पटना कॉलेज से एक विशाल मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन में राज्य भर से आए करीब 5,000 अभ्यर्थी शामिल थे। इनका मुख्य उद्देश्य बीपीएससी कार्यालय पहुंचकर अपनी आवाज उठाना था। जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब प्रदर्शनकारी छात्र आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। बैरिकेडिंग हटाने के प्रयास में हुई धक्का-मुक्की के बाद पुलिस ने बल प्रयोग शुरू कर दिया। लाठियों की बारिश से मौके पर भगदड़ मच गई। कई अभ्यर्थी गिरकर चोटिल हुए, तो कुछ के सिर से खून बहते हुए देखे गए। यह दृश्य वहां मौजूद हर किसी के लिए विचलित कर देने वाला था।
विज्ञापन में देरी का दर्द
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का गुस्सा बेवजह नहीं है। इस पूरी नाराजगी के पीछे की मुख्य वजह सरकार और बीपीएससी द्वारा दिए गए आश्वासनों का पूरा न होना है। अभ्यर्थियों के अनुसार:
- बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक ने 16 अप्रैल को एक आधिकारिक पॉडकास्ट में दावा किया था कि टीआरई-4 का विज्ञापन 3-4 दिनों में आ जाएगा।
- घोषणा के मुताबिक, आवेदन प्रक्रिया 25-26 अप्रैल से शुरू होनी थी।
- आज मई का दूसरा सप्ताह बीत जाने के बावजूद न तो विज्ञापन जारी हुआ और न ही परीक्षा की स्पष्ट तिथि घोषित की गई।
छात्र नेता दिलीप का कहना है कि प्रशासन लगातार तारीखों का खेल खेलकर युवाओं को गुमराह कर रहा है, जिससे उनकी मानसिक और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है।
46 हजार पदों का इंतजार
टीआरई-4 के तहत कुल 46,595 पदों पर भर्ती का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रक्रिया शुरू में फरवरी महीने में शुरू होने वाली थी, लेकिन शिक्षा विभाग ने अधियाचना वापस ले ली और इसे वार्षिक कैलेंडर में शामिल करने का हवाला देकर प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अभ्यर्थियों के लिए यह इंतजार अब असहनीय होता जा रहा है। बार-बार विज्ञापन टलने से उन छात्रों में भारी असंतोष है जिनकी उम्र सीमा समाप्त होने के करीब है।
सरकार का पक्ष
इस बवाल के बाद शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक बयान जारी कर छात्रों को शांत करने की कोशिश की है। मंत्री जी का कहना है कि सरकार इन समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और जल्द ही इसका ठोस समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार का मुख्य ध्येय राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारना है और नियुक्ति प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने का काम चल रहा है। हालांकि, घायल अभ्यर्थियों के लिए यह आश्वासन कितना राहत देगा, यह कहना मुश्किल है।
आगे क्या हो सकता है?
पुलिसिया कार्रवाई के बाद मामला और ज्यादा गरमा गया है। अभ्यर्थी अब केवल विज्ञापन की मांग नहीं कर रहे, बल्कि प्रशासन द्वारा की गई सख्ती की भी कड़ी निंदा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पारदर्शी तरीके से विज्ञापन जारी नहीं किया गया, तो बिहार के युवाओं का यह आंदोलन और भी बड़े स्तर पर फैल सकता है। फिलहाल, पटना में स्थिति तनावपूर्ण है और बीपीएससी कार्यालय के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
नोट: लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों का अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना उनका अधिकार है, लेकिन ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि संवाद की कमी किस हद तक टकराव को जन्म दे सकती है।








