पटना,अंग भारत। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे लंबित कार्यों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने राज्य के सभी अधिकारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि राजस्व से जुड़े सभी लंबित मामलों का निपटारा अगले 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से हो जाना चाहिए। यदि इस समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह कदम आम जनता को सालों से कार्यालयों के चक्कर काटने से निजात दिलाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी फैसला माना जा रहा है।
अधिकारियों के लिए सख्त डेडलाइन
मंत्री ने साफ किया है कि अब लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है। दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन, ई-मापी और जमीन से जुड़ी अन्य जन शिकायतों का अंबार सरकारी दफ्तरों में लगा हुआ है। मंत्री की इस चेतावनी का असर जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद है, क्योंकि उन्होंने अब ’15 दिन का अल्टीमेटम’ जारी किया है। इस अवधि में पेंडिंग फाइलों को तेजी से निपटाना होगा। यदि फाइलें लंबित पाई जाती हैं, तो इसे सीधे तौर पर अधिकारी की विफलता माना जाएगा और उन्हें अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा
हाल ही में हुई एक उच्च-स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में मंत्री ने पश्चिमी चंपारण, वैशाली और सहरसा जिलों के राजस्व कार्यों का कच्चा-चिट्ठा खोला। बैठक के दौरान कुछ जिलों में फाइलों की धीमी गति को देखकर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने केवल निर्देश नहीं दिए, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे खुद इन जिलों की रिपोर्ट की मॉनिटरिंग करेंगे।
- पश्चिमी चंपारण में राजस्व कार्यों की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाए गए।
- वैशाली और सहरसा में लंबित मामलों की संख्या को कम करने पर विशेष जोर दिया गया।
- अधिकारियों को डेटा एंट्री और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए मौके पर ही निर्देश दिए गए।
आम जनता का शोषण बंद
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब अधिकारियों को जनता को बेवजह परेशान करने की छूट नहीं होगी। अक्सर देखने में आता है कि दाखिल-खारिज के आवेदनों को बिना किसी ठोस कारण के वर्षों तक लटकाए रखा जाता है। मंत्री ने निर्देश दिया है कि यदि किसी आवेदन में कोई कमी है या दस्तावेज अधूरे हैं, तो उसे उसी समय आवेदक को स्पष्ट बताएं। बार-बार दफ्तर बुलाकर उन्हें चक्कर कटवाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
सातों दिन काम का निर्देश
काम के बोझ को कम करने और पेंडिंग आवेदनों को खत्म करने के लिए मंत्री ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर जरूरत पड़ती है, तो अधिकारियों को सुबह से देर रात तक और सप्ताह के सातों दिन काम करना होगा। यानी, अब राजस्व कार्यालयों में ‘छुट्टी’ या ‘काम का दबाव’ जैसा बहाना नहीं चलेगा।
“जनता का काम हमारी प्राथमिकता है। फाइलें मेज पर रुकने के लिए नहीं, बल्कि समाधान के लिए आती हैं। अब ढिलाई कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” – दिलीप कुमार जायसवाल, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री।
भविष्य के लिए रणनीति
बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह के साथ-साथ जिलों के डीएम और स्थानीय विधायक भी उपस्थित थे। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। आने वाले समय में निम्नलिखित सुधारों पर विभाग विशेष ध्यान दे रहा है:
| लक्ष्य | समय सीमा |
|---|---|
| लंबित दाखिल-खारिज का निपटारा | 15 दिन |
| परिमार्जन और ई-मापी शिकायतें | त्वरित निस्तारण |
| कार्यालयों की कार्य-संस्कृति | सातों दिन उपलब्धता |
यह पहल निश्चित रूप से उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जिनकी जमीनें वर्षों से विवादों या तकनीकी अड़चनों के कारण कागजों में अटकी पड़ी हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस ‘मिशन मोड’ को कितनी तत्परता से लागू करता है।








