गुवाहाटी/नई दिल्ली/अंग भारत। असम और नगालैंड के बीच लंबे समय से विवादित सीमा क्षेत्रों में ऊर्जा संसाधनों के विकास की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा। केंद्र सरकार, असम सरकार और नगालैंड सरकार के बीच कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस के अन्वेषण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।इस समझौते को क्षेत्रीय विकास, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराज्यीय सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह पहल सीमा क्षेत्रों में विकास के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ दोनों राज्यों के बीच सहयोग को भी मजबूत करेगी।
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अमित शाह की मौजूदगी में होगा समझौता
नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे। गृह मंत्रालय के कार्यालय में शाम करीब 6:30 बजे आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी और राजनीतिक नेता शामिल होंगे।समारोह में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा, नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन भी उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा केंद्र सरकार और दोनों राज्यों के उच्च अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा बनेंगे।
तेल और गैस संसाधनों के विकास का खुलेगा रास्ता
असम-नगालैंड सीमा क्षेत्र को प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से काफी समृद्ध माना जाता है। यहां कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार होने की संभावना लंबे समय से जताई जाती रही है। हालांकि अंतरराज्यीय सीमा विवादों और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण इन क्षेत्रों में संसाधनों का पूर्ण विकास नहीं हो सका।अब इस त्रिपक्षीय समझौते के बाद इन क्षेत्रों में अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
संयुक्त ढांचे के तहत होगा अन्वेषण और उत्पादन
एमओयू के तहत तेल और गैस अन्वेषण से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक संस्थागत ढांचा विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से परियोजनाओं के संचालन, निवेश, निगरानी और विकास कार्यों को समन्वित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।इसके अलावा राजस्व साझेदारी को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे दोनों राज्यों को संसाधनों के उपयोग से होने वाले आर्थिक लाभ का उचित हिस्सा मिल सके।
सीमा क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था पर रहेगा विशेष ध्यान
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू सीमा क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी है। इसके लिए केंद्र और दोनों राज्य सरकारों के बीच समन्वित तंत्र विकसित किया जाएगा, ताकि विकास परियोजनाओं के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था भविष्य में अन्य विवादित सीमा क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
सहकारी संघवाद को मिलेगा बल
केंद्र सरकार इस समझौते को सहकारी संघवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मान रही है। माना जा रहा है कि इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि असम और नगालैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और सहयोग की भावना को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।यदि यह पहल सफल रहती है तो पूर्वोत्तर भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।










