नई दिल्ली,अंग भारत। संसद के विशेष सत्र में बुधवार को महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए, जिसके बाद सदन का माहौल गर्म हो गया। सरकार की ओर से इन विधेयकों को ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, जबकि विपक्ष ने शुरुआत से ही इसका विरोध तेज कर दिया है।
Read more………संसद में आज महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पेश
तीन अहम विधेयक संसद में पेश
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और डिलिमिटेशन बिल, 2026 को लोकसभा में पेश किया। वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन के पटल पर रखा। इन विधेयकों का उद्देश्य महिला आरक्षण लागू करने के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
विपक्ष ने शुरू किया विरोध
विधेयक पेश होते ही विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह संविधान के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया।
मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर उठे सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने बहस के दौरान कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक यह कानून अधूरा रहेगा। उनके इस बयान के बाद सदन में बहस और तेज हो गई।
अमित शाह का सख्त जवाब
धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग पर गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि यह संविधान के खिलाफ है और ऐसा कोई प्रावधान संभव नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि देश में आरक्षण का आधार धर्म नहीं हो सकता।
अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा कि आधी आबादी को आरक्षण देने की बात हो रही है, लेकिन मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या व्यवस्था की गई है। इस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है, तो वह अपने स्तर पर मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे सकती है।
लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव
संशोधन विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जाएंगी। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।
महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित
प्रस्तावित योजना के तहत कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि इसके स्वरूप और क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
संसद में इन विधेयकों को लेकर जारी बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म बना रह सकता है।









