नई दिल्ली,अंग भारत। संसद के विशेष सत्र में गुरुवार को केंद्र सरकार देश की राजनीति और चुनावी ढांचे में बड़े बदलाव से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इन विधेयकों में महिला आरक्षण को लागू करने और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रावधान शामिल है। सरकार का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करना है।
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अहम विधेयकों पर रहेगी सबकी नजर
आज पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इनमें सबसे अहम संविधान संशोधन विधेयक को माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए आवश्यक परिसीमन प्रक्रिया को सक्रिय करना है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करने की तैयारी
सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन को पारित कराने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया है। इस कानून के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि विपक्ष इस विधेयक का खुलकर विरोध नहीं करेगा, हालांकि परिसीमन को लेकर मतभेद उभर सकते हैं।
परिसीमन को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में संभावित बढ़ोतरी के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। खासकर दक्षिण भारत के राज्यों ने आशंका जताई है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद नए परिसीमन में उनकी सीटें कम हो सकती हैं।
सरकार ने दी सफाई, सीटें घटने का सवाल नहीं
इस पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य की सीटों में कमी नहीं होगी और सभी राज्यों के लिए सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाएगी। सरकार के अनुसार लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या 850 तय करने का प्रस्ताव है, जबकि वर्तमान में यह संख्या 543 है।
2011 जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन
सरकार का कहना है कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए नई परिस्थितियों के अनुसार परिसीमन जरूरी है। यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर पूरी की जाएगी। हर राज्य में परिसीमन आयोग का गठन होगा, जो सभी दलों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय करेगा।
तीन दिनों में पूरी होगी संसदीय प्रक्रिया
लोकसभा में इन विधेयकों पर आज लगभग 18 घंटे तक चर्चा निर्धारित की गई है। इसके बाद 17 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। लोकसभा से पारित होने के बाद 18 अप्रैल को इन्हें राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां करीब 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा।राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दे सकता है, बल्कि देश के चुनावी ढांचे में भी बड़ा बदलाव ला सकता है।











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