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लेबनान-होर्मुज मुद्दे पर अटकी शांति वार्ता इस्लामाबाद

इस्लामाबाद,अंग भारत। पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता अभी किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। शनिवार दोपहर से शुरू हुई यह बातचीत लगभग 15 घंटे तक चली, लेकिन लेबनान और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई। हालांकि, सकारात्मक संकेत यह है कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को एक और दौर की बातचीत पर सहमति जताई है।

Read more………..21 घंटे की बातचीत बेनतीजा, वेंस लौटे अमेरिका

लेबनान और होर्मुज बना सबसे बड़ा विवाद

सूत्रों के अनुसार, वार्ता के दौरान बातचीत बार-बार लेबनान की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुद्दे पर आकर अटक गई। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोला नहीं जाता, तब तक किसी भी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल होगा।वहीं, ईरान ने अमेरिकी पक्ष पर अनुचित मांगें रखने का आरोप लगाया और कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। दोनों पक्षों ने कई दौर में मसौदों का आदान-प्रदान किया और अपने-अपने वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहे।

15 घंटे चली बातचीत, आज फिर होगा अगला दौर

ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बीच यह बैठक इस्लामाबाद के सेरेना होटल में आयोजित की गई थी, जो शनिवार दोपहर शुरू होकर रविवार सुबह तक चली। करीब 3:40 बजे यह दौर समाप्त हुआ।ईरानी पक्ष ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान के प्रस्ताव पर दोनों देशों ने रविवार को फिर से वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है। इसे 1979 की ईरानी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच सबसे उच्चस्तरीय संवाद माना जा रहा है।

पाकिस्तान निभा रहा अहम मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरी वार्ता में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और उप विदेश मंत्री इशाक डार की भूमिका इस प्रक्रिया में अहम मानी जा रही है। हालांकि, मेजबान देश होने के कारण पाकिस्तान के अधिकारियों ने वार्ता की प्रगति पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया है।

युद्ध समाप्ति और ऊर्जा संकट पर टिकी नजर

इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करना और स्थायी शांति स्थापित करना है। इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि इस वार्ता के जरिए शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई फिर शुरू कर सकता है।

इजराइल-लेबनान समझौते पर भी हलचल

इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि उनका देश लेबनान के साथ स्थायी शांति समझौते के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता तभी संभव होगा जब हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को समाप्त किया जाए और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित हो।इजराइली सेना ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में लेबनान में हिजबुल्लाह के 200 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

आगे की राह पर टिकी वैश्विक नजरें

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रविवार को होने वाला अगला दौर किस दिशा में जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रमुख विवादित मुद्दों पर सहमति बनती है, तो यह वार्ता क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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