रांची,अंग भारत। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सोमवार को आयोजित विधानसभा घेराव मार्च के दौरान छात्रों का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। भारी पुलिस बल, लाठीचार्ज और वाटर कैनन की बौछारों के बीच छात्रों ने पीछे हटने के बजाय अपने संघर्ष को एक रचनात्मक रूप दिया। इस दौरान कुछ युवाओं ने डांस करते हुए विरोध जताया, तो वहीं स्पाइडरमैन और भालू की वेशभूषा पहनकर आए प्रदर्शनकारियों ने सबका ध्यान खींचा। राज्य के युवाओं के लिए यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने रोजगार और भविष्य के अधिकारों को बचाने की एक बड़ी लड़ाई है।
प्रदर्शन का अनूठा तरीका
विधानसभा घेराव के दौरान जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का उपयोग किया, तब स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई थी। पानी की तेज बौछारों के बीच छात्रों के साहस और जोश ने उपस्थित लोगों को अचंभित कर दिया। प्रदर्शन स्थल पर निम्नलिखित घटनाएं चर्चा का विषय बनी रहीं:
- रचनात्मक विरोध: वाटर कैनन की बौछार के सामने कुछ छात्रों ने नाचते-गाते हुए विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
- साबुन का प्रयोग: कुछ छात्रों ने बौछारों के बीच सार्वजनिक सड़क पर ही साबुन लगाकर स्नान करना शुरू कर दिया, जो प्रशासन के दबाव के खिलाफ एक तीखा कटाक्ष था।
- वेशभूषा का आकर्षण: प्रदर्शन में स्पाइडरमैन और भालू की पोशाक पहनकर पहुंचे युवाओं ने तनावपूर्ण माहौल में भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
- बैरिकेडिंग पर प्रदर्शन: एक छात्र ने बैरिकेडिंग पर चढ़कर सरकार विरोधी नारेबाजी की, जिसे देखकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भी हतप्रभ थे।
भविष्य को लेकर चिंता
इस आंदोलन में शामिल प्रमुख छात्रों में राहुल कुमार, प्रवीण कश्यप और रवींद्र कुमार जैसे युवा शामिल थे। इन अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वे अपनी युवावस्था के कई कीमती वर्ष लगा देते हैं। व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग करके सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले ये युवा अब व्यवस्था से मायूस हैं।
“हमारी लड़ाई केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह उन लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है, जो पूरी मेहनत के साथ परीक्षा हॉल में बैठते हैं, लेकिन परिणाम आने पर धांधली की खबरें सुनकर उनका आत्मविश्वास टूट जाता है,” रवींद्र कुमार ने बताया।
छात्रों का मुख्य आरोप है कि जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार का जो जाल फैला है, वह योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर एक विस्तृत सूची सरकार के समक्ष रखी है:
| मांग का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| पारदर्शिता | परीक्षा से नियुक्ति तक हर चरण को सार्वजनिक करना। |
| निष्पक्ष जांच | कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच हो। |
| समान अवसर | आर्थिक आधार पर नौकरियों की खरीद-फरोख्त पर रोक। |
प्रशासन और जिम्मेदारी
छात्रों का मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में रिश्वत या सिफारिश का बोलबाला रहेगा, तो व्यवस्था के प्रति युवाओं का भरोसा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जहां गरीब और अमीर के बीच कोई भेदभाव न हो। योग्यता को ही चयन का एकमात्र आधार माना जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे केवल अपने वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लड़ रहे हैं। उनका सपना है कि राज्य में एक ऐसा तंत्र बने जहां छात्र बिना किसी डर और शंका के अपनी पढ़ाई कर सकें। विधानसभा मार्च के माध्यम से वे सरकार को यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। सरकार के लिए अब छात्रों की इन शिकायतों पर संज्ञान लेना और भर्ती प्रणाली को पारदर्शी बनाना अनिवार्य हो गया है, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे और राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान न लगे।







