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पश्चिम बंगाल CEO ऑफिस के बाहर हंगामा, 6 पर FIR दर्ज

कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर हुए भारी हंगामे और घेराव के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए छह लोगों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। इस घटना ने निर्वाचन आयोग की सुरक्षा और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इसमें दो सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों की सीधी संलिप्तता सामने आई है। हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज इस मामले ने पूरे प्रशासनिक गलियारे में हलचल मचा दी है, क्योंकि सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं।

दर्ज हुए नाम और आरोप

पुलिस की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, प्राथमिकी में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें वार्ड नंबर 32 के पार्षद शांतिरंजन कुंडू और वार्ड नंबर 36 के पार्षद सचिन सिंह का नाम सबसे ऊपर है। इन दोनों के अलावा मोहम्मद वसीम, मोइदुल, चंद्रकांत सिंह और मोहम्मद रिजवान अली को भी मामले में सह-आरोपी बनाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन सभी पर भारतीय दंड संहिता की कठोर धाराओं के तहत केस बनाया गया है, जो किसी भी तरह की ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ते हैं।

हंगामे की मुख्य वजह

विवाद की शुरुआत मुख्य रूप से मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म-6’ को लेकर हुई। घटनाक्रम कुछ इस प्रकार था:

  • कुछ व्यक्तियों द्वारा फॉर्म-6 से भरे बैग लेकर सीईओ दफ्तर में प्रवेश की कोशिश की गई।
  • तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने आरोप लगाया कि इन फॉर्म्स के जरिए बाहरी लोगों के नाम गलत तरीके से सूची में शामिल किए जा रहे थे।
  • विरोध के बीच ही वहां भाजपा कार्यकर्ता भी पहुंच गए, जिससे स्थिति राजनीतिक टकराव में बदल गई।
  • दोनों गुटों के बीच जमकर नारेबाजी हुई, जिससे देर रात तक वहां तनाव का माहौल बना रहा।

पुलिस का कड़ा रुख

घटनास्थल पर स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई थी कि पुलिस को बैरिकेडिंग करनी पड़ी और अतिरिक्त सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती करनी पड़ी। पुलिस ने बताया कि 31 मार्च और 1 अप्रैल की मध्यरात्रि को हेयर स्ट्रीट और स्ट्रैंड रोड चौराहे पर इन लोगों ने जमावड़ा कर रखा था। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी जब भीड़ नहीं हटी और अधिकारियों के काम में व्यवधान उत्पन्न किया गया, तब जाकर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया। इस हंगामे के कारण व्यस्त सड़क पर जाम लग गया और आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

आरोपों की गंभीरता

प्राथमिकी में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि आरोपी न केवल सरकारी काम में बाधा डाल रहे थे, बल्कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के खिलाफ उकसावे वाले नारों का इस्तेमाल भी किया गया। सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ सार्वजनिक रूप से नारेबाजी और घेराव करना कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध माना गया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।

सुरक्षा और भविष्य

इस घटना के बाद निर्वाचन आयोग के कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थानीय पुलिस ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र में धारा 163 का दायरा भी बढ़ा दिया था ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। चुनावी प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अब वहां आने वाले हर व्यक्ति और गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल करने की उम्मीद है।

चुनावी प्रक्रिया लोकतंत्र का आधार है, और इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार है। प्रशासन का यह कदम यह संदेश देता है कि निर्वाचन आयोग की पवित्रता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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