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झारखंड पेपर लीक केस में छह आरोपितों को झटका, जमानत याचिका खारिज

रांची,अंग भारत। झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जेल में बंद छह आरोपितों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। रांची की अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने सोमवार को सभी आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने केस डायरी, उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपितों के आपराधिक इतिहास का अवलोकन करने के बाद यह फैसला सुनाया।

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अदालत ने नहीं दी राहत

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि कथित धन लेन-देन को लेकर कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। इसके समर्थन में उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला भी दिया गया। हालांकि अदालत ने जांच एजेंसी की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों को पर्याप्त मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।जिन आरोपितों की जमानत याचिका खारिज हुई उनमें आशीष कुमार, विकास कुमार, योगेश प्रसाद, रंजीत कुमार उर्फ चुनचुन, गुलाब चंद महतो और बुलबुल पांडे उर्फ राज शामिल हैं।

पेपर सॉल्वर गिरोह से जुड़े होने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, इनमें से कुछ आरोपित पेपर सॉल्वर गिरोह के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। उनका कार्य अभ्यर्थियों और गिरोह के सदस्यों के बीच संपर्क स्थापित करना तथा परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर सौदेबाजी करना था।अदालत के निर्देश पर अनुसंधानकर्ता ने आरोपितों का आपराधिक रिकॉर्ड और केस डायरी भी प्रस्तुत की थी, जिसके आधार पर जमानत याचिकाओं पर फैसला लिया गया।

155 लोगों की हुई थी गिरफ्तारी

मामला 11 अप्रैल की रात सामने आया था, जब पुलिस को सूचना मिली कि रांची जिले के तमाड़ थाना क्षेत्र स्थित रड़गांव के एक अर्धनिर्मित भवन में बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है। सूचना के आधार पर गठित विशेष छापेमारी दल ने वहां कार्रवाई की।पुलिस के पहुंचते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई लोग भागने का प्रयास करने लगे। छापेमारी के दौरान कुल 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें कथित अंतरराज्यीय पेपर लीक गिरोह के सरगना बताए जा रहे अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद समेत कई अन्य आरोपित शामिल थे।

अभ्यर्थियों से मांगे गए थे लाखों रुपये

जांच में सामने आया कि गिरोह ने अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने का झांसा देकर प्रति उम्मीदवार 10 लाख रुपये तक की मांग की थी। आरोप है कि कई अभ्यर्थियों से बैंक चेक भी लिए गए थे। पुलिस के मुताबिक, अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और प्रवेश पत्र भी अपने कब्जे में रख लिए गए थे ताकि जानकारी बाहर न जा सके।फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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