नई दिल्ली अंग भारत। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में एक बार फिर से जोश देखने को मिला, जहाँ सेंसेक्स ने 325 अंकों की मजबूत बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की। निवेशकों के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि पिछले कारोबारी दिन बाजार सुस्ती के साथ बंद हुआ था। बाजार की यह तेजी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बन रहे सकारात्मक माहौल और निवेशकों के बीच लौटते भरोसे का नतीजा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता की संभावनाओं ने बाजार में एक नई जान फूंक दी है।
बाजार में खरीदारी का उत्साह
शुक्रवार को जैसे ही बाजार खुले, बीएसई सेंसेक्स 324.95 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की उछाल के साथ 75,508.31 के स्तर पर पहुंच गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और करीब 96.10 अंक यानी 0.41 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,750.80 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार के जानकारों का मानना है कि सप्ताह के अंत में आई यह तेजी यह दर्शाती है कि भारतीय निवेशकों का सेंटिमेंट अभी भी मजबूत बना हुआ है।
किन सेक्टरों ने दम दिखाया
आज के कारोबार में खरीदारी का ट्रेंड काफी स्पष्ट था। कुछ चुनिंदा सेक्टरों में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया, जिससे सूचकांकों को ऊपर जाने में मदद मिली:
- बैंकिंग सेक्टर: बड़े प्राइवेट और सरकारी बैंकों के शेयरों में अच्छी मांग देखी गई।
- रियल्टी सेक्टर: रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई।
- मिडकैप और स्मॉलकैप: चुनिंदा मिडकैप शेयरों में भी रौनक देखी गई, जिससे मार्केट ब्रेड्थ काफी बेहतर रही।
रुपया और वैश्विक संकेत
शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी सकारात्मक असर दिखा। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6 पैसे की बढ़त के साथ 83.30 (संशोधित) के आसपास कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की कीमतें भी 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हैं, जो घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, बाजार अभी भी वैश्विक परिस्थितियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
गुरुवार की सुस्ती का अंत
यदि हम पीछे मुड़कर देखें, तो गुरुवार का दिन बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा था। सेंसेक्स 135.03 अंक टूटकर 75,183.36 पर बंद हुआ था और निफ्टी में भी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दौरान निवेशकों में घबराहट साफ दिख रही थी, लेकिन शुक्रवार की रिकवरी ने उस डर को काफी हद तक मिटा दिया है। शुक्रवार का यह उछाल उन निवेशकों के लिए एक अवसर की तरह है जिन्होंने पिछले सत्रों में गिरावट के दौरान सतर्क रुख अपना रखा था।
आगे क्या उम्मीद रखें?
बाजार के दिग्गज मानते हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल निम्नलिखित कारकों पर टिकी होगी:
| फैक्टर | प्रभाव का कारण |
|---|---|
| पश्चिम एशिया शांति वार्ता | तनाव घटने से वैश्विक स्थिरता बढ़ेगी। |
| विदेशी निवेश (FII) | अगर विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते हैं, तो तेजी बनी रहेगी। |
| कच्चे तेल की कीमतें | कीमतों में स्थिरता भारतीय महंगाई को काबू में रखेगी। |
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की जल्दबाजी में आकर बड़ा निवेश न करें। बाजार में उतार-चढ़ाव अभी भी बना रह सकता है, इसलिए ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपनाना समझदारी है। बाजार की इस दौड़ में केवल उन्हीं शेयरों पर दांव लगाएं जिनके फंडामेंटल मजबूत हैं। कुल मिलाकर, घरेलू बाजार में लौटती यह रौनक भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति वैश्विक विश्वास का प्रतीक है।








