शंभूगंज/बांका/अंग भारत। पराली जलाने की एक गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड स्थित सहदेवपुर बहियार में एक किसान की महीनों की कड़ी मेहनत को चंद मिनटों में राख कर दिया। रायपुरा गांव के निवासी अनिल कुमार सिंह की एक बीघा से अधिक गेहूं की तैयार फसल इस आग की भेंट चढ़ गई। यह घटना सिर्फ एक खेत के जलने की नहीं, बल्कि उस दर्द की दास्तां है जिसे हर साल फसल कटाई के समय हजारों किसान अनचाहे झेलते हैं। अनिल कुमार की फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन किसी अज्ञात व्यक्ति की लापरवाही ने उनके आर्थिक भविष्य पर गहरा घाव दे दिया है।
आग का विकराल रूप
घटना की शुरुआत बहियार क्षेत्र के एक छोटे से कोने से हुई, जहाँ किसी ने खेत के अवशेष यानी पराली में आग लगा दी थी। उस वक्त हवा का रुख और गति तेज थी, जिसने चिंगारी को देखते ही देखते एक विकराल आग में बदल दिया। आग ने इतनी तेजी से अपना दायरा बढ़ाया कि आसपास के अन्य खेतों तक पहुँचने में इसे वक्त नहीं लगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से ही सब कुछ साफ दिख रहा था। अनिल कुमार सिंह जब तक अपने खेत की ओर भागते, तब तक उनकी पूरी मेहनत का फल जलकर स्वाहा हो चुका था।
बेबस थे ग्रामीण
ग्रामीणों ने आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और आग की भीषणता के आगे वे बेबस नजर आए। खेत में खड़ी गेहूं की सूखी फसल आग के लिए ईंधन का काम कर रही थी। लोगों का कहना है:
- तेज हवाओं ने आग को एक खेत से दूसरे खेत तक तेजी से पहुंचाया।
- मौके पर दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही सब कुछ खाक हो गया था।
- पानी या रेत के जरिए आग बुझाने के प्रयास नाकाफी साबित हुए।
इस घटना ने किसानों के बीच एक गहरा डर पैदा कर दिया है कि उनकी फसल अब सुरक्षित नहीं है।
भारी आर्थिक नुकसान
पीड़ित किसान अनिल कुमार सिंह के अनुसार, उन्हें इस दुर्घटना में करीब 15,000 रुपये से अधिक का सीधा नुकसान हुआ है। यह रकम कागज पर छोटी लग सकती है, लेकिन एक छोटे किसान के लिए यह बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च की गई पूरी जमा-पूंजी है। कटाई से ठीक पहले इस तरह की त्रासदी किसी भी परिवार की आर्थिक कमर तोड़ देने के लिए काफी है। अनिल अभी भी सदमे में हैं और उन्हें इस बात का मलाल है कि जिसने भी आग लगाई, उसने बिना सोचे-समझे पूरे बहियार के भविष्य को जोखिम में डाल दिया।
प्रशासन की भूमिका
फिलहाल, शंभूगंज की प्रभारी अंचल अधिकारी कविता कुमारी ने इस मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं और आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। किसान अब कृषि विभाग से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हालांकि, सरकारी मदद मिलने की प्रक्रिया अक्सर लंबी होती है, जिससे किसान का मन भारी है।
क्या करें किसान?
इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:
- खेतों के आसपास आग न जलाएं और दूसरों को भी रोकें।
- फसल कटाई के दौरान खेतों की निगरानी बढ़ाएं।
- पराली को जलाने के बजाय खाद में बदलने की तकनीकों का उपयोग करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय अंचल अधिकारी को दें।
जागरूकता ही बचाव
पराली जलाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी खत्म करता है। शंभूगंज की यह घटना एक चेतावनी है कि थोड़ी सी सावधानी से हम अपनी और अपने पड़ोसी की फसल को बचा सकते हैं। जब तक किसान खुद जागरूक नहीं होंगे और प्रशासन की ओर से सख्त निगरानी नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती रहेंगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में अनिल कुमार को कब तक और किस तरह की राहत पहुंचाता है।








