नईदिल्ली,अंग भारत| दो महीने तक ‘ग्राउंडेड’ रहने के बाद अब भारतीय वायु सेना के स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान एक बार फिर आसमान में उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। तकनीकी खामियों को दूर करने और विस्तृत जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वायु सेना ने तेजस फ्लीट को फिर से ऑपरेशन के लिए मंजूरी दे दी है।
लगातार हादसों के बाद लिया गया फैसला
दरअसल, पिछले कुछ समय में तेजस लड़ाकू विमानों से जुड़ी तीन घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। सबसे हालिया हादसा 7 फरवरी को हुआ था, जब एक तेजस विमान पश्चिमी मोर्चे के एक फॉरवर्ड बेस से टेकऑफ के दौरान रनवे से फिसलकर पास की मिट्टी की खाई में जा गिरा। इस घटना में पायलट सुरक्षित बच गया, हालांकि उसे चोटें आई थीं।इससे पहले मार्च 2024 में जैसलमेर के पास एक विमान क्रैश हुआ था, जबकि नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान एक और हादसा हुआ, जिसमें पायलट की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद वायु सेना ने एहतियात के तौर पर लगभग 35 तेजस मार्क-1 विमानों को ग्राउंड कर दिया था।
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तकनीकी जांच में सामने आई खामियां
पूरे फ्लीट को रोकने के बाद भारतीय वायु सेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की संयुक्त टीम ने गहन तकनीकी जांच की। जांच के दौरान यह सामने आया कि विमान के ब्रेकिंग सिस्टम से जुड़े सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी थी, जिसके कारण रनवे पर नियंत्रण में समस्या आ रही थी।इसके अलावा, अंडर-कैरिज की संरचना, पहियों की मेटलर्जी और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक ब्रेकिंग सिस्टम की भी बारीकी से जांच की गई। विशेषज्ञों ने पाया कि इन प्रणालियों में सुधार की आवश्यकता थी, जिसे समय रहते पूरा किया गया।
सॉफ्टवेयर अपग्रेड के बाद मिली मंजूरी
एचएएल के चेयरमैन डीके सुनील के अनुसार, विमान के ब्रेकिंग सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया गया है। यह पूरी तरह नया सिस्टम नहीं बल्कि मौजूदा सॉफ्टवेयर का उन्नत संस्करण है, जिससे विमान की सुरक्षा और नियंत्रण क्षमता में सुधार हुआ है।सभी जरूरी सुधार करने के बाद फ्लीट पर कई स्तर के परीक्षण किए गए। परीक्षण सफल रहने के बाद ही वायु सेना ने तेजस लड़ाकू जेट्स को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति दी है।
आधुनिक तकनीक पर आधारित है तेजस
तेजस एक अत्याधुनिक हल्का लड़ाकू विमान है, जो अपने ऑन-बोर्ड मिशन कंप्यूटर पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसमें कंप्यूटर आधारित टारगेटिंग, रडार सिग्नेचर प्रोसेसिंग और फायरिंग सिस्टम जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं।फिलहाल, तेजस फ्लीट के दोबारा सक्रिय होने से भारतीय वायु सेना की ताकत में फिर से इजाफा होगा। इससे पहले फरवरी में पोखरण में हुए ‘वायु शक्ति’ अभ्यास में भी ये विमान शामिल नहीं हो पाए थे।अब सभी जरूरी सुधारों और परीक्षणों के बाद तेजस का फिर से उड़ान भरना भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।









