कोलकाता, अंग भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोलकाता आगमन से ठीक एक रात पहले महानगर में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बकाया केंद्रीय राशि के मुद्दे को लेकर बड़े पैमाने पर होर्डिंग लगाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। इन होर्डिंग के जरिए तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल का 1 लाख 96 हजार करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया है। शहर के प्रमुख मार्गों और मां फ्लाईओवर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर ‘गो बैक मोदी’ के नारों के साथ लगाए गए ये पोस्टर प्रधानमंत्री की प्रस्तावित ब्रिगेड मैदान यात्रा के ठीक पहले एक तीखे राजनीतिक विरोध के रूप में देखे जा रहे हैं।
राजनीतिक माहौल और विरोध
शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी राजनीतिक सभा प्रस्तावित है। भाजपा ने इस आयोजन के लिए शहर भर में व्यापक तैयारी की है, जहां सभा से जुड़े होर्डिंग और झंडे लगाए गए हैं। इसी के जवाब में तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार रात को ही अपने होर्डिंग लगाकर पूरी रणनीति के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
- प्रमुख चौक-चौराहों पर भारी संख्या में पोस्टर लगाए गए।
- ‘गो बैक मोदी’ का नारा प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
- वित्तीय अधिकारों को लेकर केंद्र पर तीखे सवाल उठाए गए।
वित्तीय बकाया का मुद्दा
तृणमूल कांग्रेस का मुख्य आरोप है कि केंद्र सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के कारण राज्य का बकाया रोक रही है। पार्टी के दावों के अनुसार, 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद से ही विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की राशि को मंजूरी नहीं दी गई है। राज्य सरकार ने जिन योजनाओं का उल्लेख किया है, वे निम्न प्रकार हैं:
| योजना का नाम | सरकार का रुख |
|---|---|
| आवास योजना | लाभार्थियों को राशि में देरी |
| 100 दिन का कार्य | मजदूरी भुगतान रुका |
| ग्रामीण सड़क योजना | निधि का अभाव |
राज्य सरकार की पहल
तृणमूल नेतृत्व का तर्क है कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे राज्य की जनता के प्रति प्रतिबद्ध हैं। केंद्र की ओर से निधि न मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने खुद अपने दम पर कई बड़े काम शुरू किए हैं। विशेष रूप से ‘पथश्री’ परियोजना के तहत राज्य सरकार ने लगभग 20 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य हाथ में लिया है। इसके साथ ही ‘हमारा पाड़ा हमारा समाधान’ पहल के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सड़क मरम्मत और बुनियादी ढांचों के सुधार का काम जारी है।
योजनाओं का क्रियान्वयन
आगामी चुनावों को देखते हुए राज्य सरकार का दावा है कि उन्होंने लगभग 32 लाख लाभार्थियों को आवास योजना की पहली किश्त जारी की है। हालांकि, केंद्र सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है और राज्य द्वारा खर्चों के ऑडिट या उचित हिसाब न देने को इन फंडों के रुकने का कारण बताती है।
आने वाले दिन
ब्रिगेड मैदान में होने वाली प्रधानमंत्री की सभा और उसके जवाब में तृणमूल का यह होर्डिंग वॉर इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से ‘फंड बनाम विकास’ के इर्द-गिर्द सिमट गई है। शनिवार की सभा में प्रधानमंत्री क्या घोषणाएं करते हैं और इस पर तृणमूल का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं। यह संघर्ष केवल होर्डिंग्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते संवैधानिक और राजनीतिक टकराव की एक बानगी है।








