Founder – Mohan Milan

असम में बाढ़ का कहर,13 जिलों में 1.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित

असम में बाढ़ की विनाशकारी स्थिति के बीच पानी में डूबे हुए गांव, जलमग्न कच्चे मकान और राहत शिविरों की ओर पलायन करते लोग।

गुवाहाटी,अंग भारत। असम में आई भीषण और विनाशकारी बाढ़ की रफ्तार भले ही कुछ कम हुई है, लेकिन राज्य में तबाही के निशान अब भी गहरे हैं। असम के लोगों का जनजीवन इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है, खासकर ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में स्थिति सामान्य होने में अभी लंबा वक्त लगेगा। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चराईदेव जिले में शुक्रवार को एक और शव मिलने के साथ ही इस आपदा में जान गवा चुके लोगों का कुल आंकड़ा 97 तक पहुंच चुका है। हालांकि सरकार प्रभावितों को आर्थिक और प्रशासनिक मदद पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर विस्थापन और बुनियादी ढांचे का विनाश इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

प्रभावित जिलों का हाल

असम के कुल 13 जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें शिवसागर, गोलाघाट, नगांव, होजाई, शोणितपुर, धेमाजी, दरंग, बिश्वनाथ, कामरूप (मेट्रो), लखीमपुर, उदालगुरी, जोरहट और चराईदेव शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन 13 जिलों के 33 राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले 464 गांव पूरी तरह जलमग्न हैं। कुल 1,55,849 लोग इस आपदा से सीधे प्रभावित हुए हैं और पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं।

कृषि क्षेत्र को भी इस बाढ़ से तगड़ा झटका लगा है। बाढ़ के पानी ने कुल 10,748.64 हेक्टेयर कृषि भूमि को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। खेती-बाड़ी पर निर्भर रहने वाले हजारों परिवारों के सामने अब आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

खतरे के निशान पर नदियां

एएसडीएमए की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, धनसिरि नदी गोलाघाट और नुमलीगढ़ में लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके साथ ही श्रीभूमि इलाके में कुसियारा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान को पार कर चुका है। नदियों के इस उग्र रूप ने तटीय इलाकों के निवासियों के मन में दहशत पैदा कर दी है, जिससे लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं।

मकानों को भारी नुकसान

बाढ़ के तेज बहाव ने लोगों के आशियाने उजाड़ दिए हैं। कच्चे और पक्के दोनों तरह के घरों को भारी क्षति पहुंची है। प्रभावित क्षेत्रों में संपत्ति के नुकसान का विवरण इस प्रकार है:

  • पूर्णतः क्षतिग्रस्त कच्चे मकान: कुल 122 घर नष्ट हुए हैं, जिनमें से 120 शिवसागर और 2 धेमाजी में हैं।
  • पूर्णतः क्षतिग्रस्त पक्के मकान: शिवसागर जिले में 4 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं।
  • आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकान: कुल 268 घरों को आंशिक नुकसान हुआ है, जिसमें शिवसागर में 216, दरंग में 50 और धेमाजी में 2 मकान शामिल हैं।
  • आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकान: अकेले शिवसागर जिले में ऐसे 76 मकानों को क्षति पहुंची है।
  • मवेशी शेड का नुकसान: शिवसागर में 213 पशु आश्रय स्थल (मवेशी शेड) क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

राहत शिविरों की स्थिति

विस्थापित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर राहत शिविरों का संचालन शुरू किया है। वर्तमान में राज्य में कुल 73 शिविर सक्रिय हैं, जिनमें 55 राहत शिविर और 18 राहत वितरण केंद्र शामिल हैं।

इन केंद्रों पर दी जा रही मदद और राहत सामग्री का ब्यौरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

राहत सामग्री / लाभार्थी प्रकार कुल मात्रा / प्रभावितों की संख्या
राहत शिविरों में शरणार्थी 10,326 लोग
वितरण केंद्रों से मदद पाने वाले बाहरी लोग 6,881 लोग
बांटा गया चावल 121.098 क्विंटल
बांटी गई दाल 22.413 क्विंटल
बांटा गया नमक 6.7329 क्विंटल
बांटा गया सरसों तेल 477.37 लीटर

मवेशियों पर बड़ी आफत

बाढ़ का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। राज्य के कुल 47,879 जानवर इस विभीषिका से प्रभावित हुए हैं। इनमें 22,846 बड़े मवेशी, 18,083 छोटे मवेशी और पोल्ट्री सेक्टर के 6,950 मुर्गे-मुर्गियां शामिल हैं। प्रशासन ने पशुओं के चारे के लिए 278.791 क्विंटल गेहूं का चोकर और 75.4 क्विंटल चावल का चोकर वितरित किया है ताकि बेजुबान जानवरों को भुखमरी से बचाया जा सके।

सक्रिय रेस्क्यू ऑपरेशंस

बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। इस काम में एसडीआरएफ, भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (एफ एंड ईएस), स्थानीय प्रशासन और नागरिक सुरक्षा के प्रशिक्षित स्वयंसेवक दिन-रात काम कर रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में शुक्रवार को कुल 219 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया ताकि महामारियों और संक्रामक बीमारियों के फैलने के खतरे को रोका जा सके। राहत कार्यों में लगी 8 लाइफबोट्स के जरिए अत्यंत संवेदनशील इलाकों से 112 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पुनर्निर्माण और सरकारी समीक्षा

सड़कें, पुल, बिजली के खंभे और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस संकट से निपटने के लिए असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा और राज्य कैबिनेट के अन्य मंत्री लगातार उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और जमीनी स्थिति की खुद निगरानी कर रहे हैं।

सरकार प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्राथमिकता न केवल फौरी राहत पहुंचाना है, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे का तेजी से पुनर्निर्माण करना भी है ताकि जनजीवन सामान्य पटरी पर लौट सके।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी देरी के नुकसान का आकलन करें ताकि प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि जल्द से जल्द ट्रांसफर की जा सके। यह पुनर्निर्माण प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन वर्तमान में प्रशासन का मुख्य ध्यान महामारी से बचाव और बेघर हुए लोगों के सुरक्षित पुनर्वास पर केंद्रित है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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