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असम के 12 जिलों में बाढ़ का कहर, 1.47 लाख से अधिक लोग प्रभावित; एक और शव बरामद

गुवाहाटी,अंग भारत। असम में विनाशकारी बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे राज्य के 12 जिलों में 1.47 लाख से अधिक लोग गंभीर संकट में हैं। हालात इस कदर नाजुक बने हुए हैं कि शनिवार को गोलाघाट जिले में एक और शव बरामद होने के बाद इस मानसून सीजन में बाढ़ से जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 98 तक पहुंच गया है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का उफान थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे हजारों परिवारों का आशियाना उजड़ गया है। लोग ऊंचे स्थानों और अस्थाई राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। राज्य प्रशासन लगातार राहत कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान के कारण सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

स्कूल खोलने की चुनौती

असम सरकार की योजना 10 अगस्त से बाढ़ प्रभावित इलाकों में दोबारा स्कूल खोलने की है। लेकिन जमीनी हकीकत इस सरकारी योजना के आड़े आ रही है। अधिकांश सरकारी स्कूलों के कमरों और मैदानों में घुटनों तक कीचड़ और गाद जमा है। कई ऐसे स्कूल हैं जो ऊंचाई पर बने होने के कारण इस समय राहत शिविरों में तब्दील हो चुके हैं। वहां बेघर हुए बाढ़ पीड़ित रह रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब स्कूलों में बाढ़ प्रभावित लोग शरण लिए हुए हैं और परिसर में गंदगी फैली है, तो तय तारीख पर बच्चों की पढ़ाई कैसे शुरू हो पाएगी? विशेषकर ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट में हालात बेहद खराब हैं, जहां रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह ठप पड़ी है।

नदियों का रौद्र रूप

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा 8 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कई प्रमुख नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। धनसिरि नदी गोलाघाट और नुमलीगढ़ में खतरे के निशान को पार कर चुकी है। इसी तरह, श्रीभूमि इलाके में कुसियारा नदी का जलस्तर भी चेतावनी रेखा से ऊपर बना हुआ है। जब तक इन प्रमुख नदियों का पानी नहीं उतरता, तब तक तटीय और निचले इलाकों में जमा पानी कम होना नामुमकिन है। यह जलभराव खेतों और रिहायशी इलाकों के लिए बड़ी आफत बना हुआ है, जिससे लोगों का अपने घरों को लौटना मुश्किल हो गया है।

नुकसान का आंकड़ा

बाढ़ की इस विनाशकारी लहर से असम के कुल 12 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इनमें शोणितपुर, नगांव, गोलाघाट, शिवसागर, होजाई, दरंग, जोरहाट, धेमाजी, चराईदेव, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और बिश्वनाथ शामिल हैं। इन प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:

प्रभावित क्षेत्र/श्रेणी कुल संख्या / माप
कुल प्रभावित जिले 12 जिले
प्रभावित राजस्व मंडल 30 मंडल
प्रभावित गांवों की संख्या 460 गांव
बाढ़ से प्रभावित आबादी 1,47,376 लोग
प्रभावित कृषि भूमि 10,599.89 हेक्टेयर

कृषि भूमि के डूबने से स्थानीय किसानों की रीढ़ टूट चुकी है। धान और अन्य मौसमी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे आने वाले समय में भुखमरी और आर्थिक तंगी का खतरा मंडराने लगा है।

राहत और बचाव कार्य

इस संकट की घड़ी में लोगों की जान बचाने के लिए राज्य और केंद्र की कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। राहत कार्यों में एसडीआरएफ (SDRF), भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ (NDRF), डीडीआरएफ (DDRF), वायु सेना, असम पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (F&ES), स्थानीय सिविल प्रशासन और नागरिक सुरक्षा के प्रशिक्षित स्वयंसेवक दिन-रात जुटे हुए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में शनिवार को चलाए गए विशेष अभियान के दौरान प्रशासन ने बड़ी सफलता हासिल की है:

  • बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में कुल 55 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है।
  • यातायात और रेस्क्यू के लिए 10 बड़ी नावें लगातार पानी में दौड़ रही हैं।
  • इन नावों के जरिए शनिवार को बाढ़ में फंसे 135 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया।
  • इंसानों के साथ-साथ मूक पशुओं को भी बचाया जा रहा है, जिसमें शनिवार को 5 मवेशियों को सुरक्षित निकाला गया।

पुनर्निर्माण और समीक्षा

बाढ़ के पानी ने असम के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। सैकड़ों सड़कें बह गई हैं, पुलों में दरारें आ गई हैं और बिजली के खंभे उखड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा खुद हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वे लगातार कैबिनेट मंत्रियों और जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। सरकार का मुख्य ध्यान इस समय राहत शिविरों में राशन, साफ पीने का पानी और जरूरी दवाइयों की कमी न होने देने पर है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही पानी थोड़ा कम हो, सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए ताकि संपर्क बहाल हो सके।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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