Founder – Mohan Milan

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ और ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के वीर सेनानियों को राष्ट्र ने किया नमन

भारत छोड़ो आंदोलन और काकोरी ट्रेन एक्शन के शहीदों को श्रद्धांजलि देते पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह

नई दिल्ली, अंग भारत। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह समेत देश के तमाम बड़े नेताओं ने रविवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (अगस्त क्रांति) की वर्षगांठ और ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शहीदों को नमन किया। 9 अगस्त भारतीय इतिहास की वह तारीख है जिसने फिरंगी हुकूमत की नींव हिलाकर रख दी थी। एक तरफ जहां 1942 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को देश से खदेड़ने के लिए ‘करो या मरो’ का नारा दिया, वहीं दूसरी तरफ 1925 में इसी दिन क्रांतिकारियों ने काकोरी में सरकारी खजाने को अपने अधिकार में लेकर अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती दी थी। आज देश के शीर्ष नेतृत्व ने इन दोनों महान घटनाओं के नायकों और अमर सेनानियों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है और उनके सपनों का भारत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

अगस्त क्रांति का महत्व

महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे निर्णायक मोड़ माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रनायकों को याद करते हुए लिखा कि ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने वाले सभी लोगों का साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उन्होंने आगे लिखा कि महात्मा गांधी के इस ऐतिहासिक आह्वान ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में एक अभूतपूर्व नई ऊर्जा का संचार किया और ब्रिटिश शासन से पूरी तरह मुक्त होने के हमारे देशवासियों के अडिग संकल्प को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। यह केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि आजादी के लिए तड़प रहे करोड़ों भारतीयों का सामूहिक शंखनाद था जिसने औपनिवेशिक शासकों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

नेताओं की भावपूर्ण श्रद्धांजलि

देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस दिन को राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी का “करो या मरो” का नारा उस चुनौतीपूर्ण दौर में करोड़ों देशवासियों के लिए साहस और दृढ़ संकल्प की एक सामूहिक आवाज बन गया था। इस आंदोलन में न केवल जाने-माने नेताओं ने, बल्कि देश के कोने-कोने से आए असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की कठोर यातनाएं झेलीं, असीम संघर्ष किया और अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

ओम बिरला ने इस बात पर विशेष बल दिया कि हमारे पूर्वजों का यह संघर्ष केवल एक राजनीतिक आजादी हासिल करने तक सीमित नहीं था। वे एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे जिसकी नींव कुछ खास सिद्धांतों पर टिकी हो:

  • सत्य और अहिंसा: हर नागरिक के जीवन और आचरण का मूल आधार।
  • लोकतंत्र और समानता: समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों की पहुंच।
  • सच्ची राष्ट्रभक्ति: व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देश को प्राथमिकता देना।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने देशवासियों को अपनी राष्ट्रीय विरासत की याद दिलाते हुए कहा कि इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन ने पूरे देश में एक नई राष्ट्रीय चेतना फूंक दी थी। हमें आज जो खुली हवा में सांस लेने की आजादी मिली है, वह महात्मा गांधी और देश के असंख्य क्रांतिकारियों के त्याग, तपस्या और बलिदान की ही देन है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज की पीढ़ी के लिए उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सब मिलकर एक मजबूत, समृद्ध, आत्मनिर्भर और पूरी तरह से विकसित भारत के निर्माण के लिए लगातार प्रयास करते रहें।

काकोरी ट्रेन एक्शन

गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह ने इतिहास के उन सुनहरे पन्नों को याद किया जो सशस्त्र क्रांति की गवाही देते हैं। अमित शाह ने कहा कि अगस्त क्रांति का यह पावन दिन देशवासियों को एकजुट होकर स्वदेशी अपनाने, पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने और ‘विकसित भारत’ के बड़े सपने को हकीकत में बदलने की राह दिखाता है। इसके साथ ही उन्होंने ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ को याद करते हुए इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा साहसिक और अविस्मरणीय अध्याय बताया जिसने फिरंगी हुकूमत के जुल्म और ज्यादतियों के खिलाफ हथियारबंद क्रांति को एक नई ताकत दी थी।

“9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी में चंद्रशेखर आजाद और राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में वीर क्रांतिकारियों ने अपने अदम्य साहस और समर्पण से ब्रिटिश शासन को यह स्पष्ट संदेश दे दिया था कि इस देश के संसाधनों पर केवल और केवल यहां के नागरिकों का अधिकार है।”— अमित शाह, गृह एवं सहकारितामंत्री

अमित शाह ने आगे कहा कि देश अपने इस आत्मसम्मान की रक्षा करने वाले काकोरी ट्रेन एक्शन के सभी अमर क्रांतिकारियों का हमेशा ऋणी रहेगा।

विकसित भारत का संकल्प

सड़क परिवहन एवं राजमार्गमंत्री नितिन गडकरी ने भी इस दिन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए देशवासियों को याद दिलाया कि साल 1942 में आज ही के पावन दिन पर देशवासियों ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एकजुट होकर विदेशी शासन के खिलाफ बिगुल फूंका था। वहीं विदेशमंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों का अमूल्य योगदान हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल धरोहर है, जिसे सहेज कर रखना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है।

केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने देश के युवाओं से अपील की कि वे राष्ट्र के नवनिर्माण में अपनी सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाएं, ताकि इन अमर शहीदों के सपनों का एक सशक्त, स्वावलंबी और समृद्ध भारत बनाया जा सके। दूसरी तरफ, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याणमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अगस्त क्रांति को भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम पृष्ठ बताया जिसने देशवासियों के दिलों में आजादी की कभी न बुझने वाली लौ जला दी थी। उन्होंने कहा कि हमारे इन अमर सेनानियों के अभूतपूर्व त्याग, अटूट संघर्ष और परम बलिदान को यह देश हमेशा आदर के साथ याद रखेगा।

नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आप 9 अगस्त के इन दो सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाक्रमों के मुख्य अंतर और उनके महत्व को आसानी से समझ सकते हैं:

ऐतिहासिक घटना प्रमुख वर्ष मुख्य नेतृत्व/नायक मुख्य उद्देश्य और संदेश
भारत छोड़ो आंदोलन 1942 महात्मा गांधी अंग्रेजी हुकूमत को देश से बाहर करना और ‘करो या मरो’ के नारे के साथ पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना।
काकोरी ट्रेन एक्शन 1925 चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल सशस्त्र क्रांति के लिए ब्रिटिश खजाने को जब्त करना और यह जताना कि भारत के संसाधनों पर भारतीयों का अधिकार है।

आज जब भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब इन दोनों घटनाओं की वर्षगांठ हमें याद दिलाती है कि हमारी आजादी कितनी अनमोल है। इतिहास के ये दोनों पन्ने हमें केवल अतीत की याद नहीं दिलाते, बल्कि वर्तमान में एक मजबूत और एकजुट समाज के निर्माण की जिम्मेदारी भी सौंपते हैं। देश के इन शीर्ष नेताओं के संदेशों से साफ है कि आज के समय में सच्ची देशभक्ति केवल सीमाओं की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि देश के विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना भी है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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