पिपरा (सुपौल),बिहार: बिहार के सुपौल जिले की पिपरा थाना पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने शनिवार को दो अलग-अलग जगहों पर छापेमारी करते हुए भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन और नेपाली सोफी शराब जब्त की है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो नशीले इंजेक्शन के धंधेबाज और चार शराब तस्कर शामिल हैं। पुलिस ने मौके से एक पिकअप वैन, एक मारुति सुजुकी कार और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और उत्पाद अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
मुख्य कार्रवाई की जानकारी
पिपरा पुलिस को पिछले कुछ समय से इलाके में नशीली दवाओं और सीमा पार से आने वाली शराब की तस्करी की शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस की इस दोहरी कार्रवाई ने तस्करों के पूरे सिंडिकेट को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। पुलिस ने दोनों मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल माल जब्त किया, बल्कि तस्करों को रंगे हाथ दबोचने में भी सफलता पाई।
प्रतिबंधित नशीली सुई जब्त
पुलिस की पहली कार्रवाई कटैया माहे वार्ड 5 में हुई। गश्त के दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध बाइक को रोककर उसकी जांच की। बाइक सवार युवक की तलाशी लेने पर उसके पास से 246 एमएल प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन, एक मोबाइल और 700 रुपये नकद बरामद हुए। पूछताछ में बाइक सवार की पहचान सलमान खान के रूप में हुई, जो मुस्ताक आलम का बेटा है और बथनाहा वार्ड 4 का निवासी है। पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया। सलमान खान से की गई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने तुरंत अगली रणनीति बनाई। उसकी निशानदेही पर पुलिस की टीम ने निर्मली चौक स्थित एक दुकान पर छापा मारा। वहां से पुलिस को 8 एमएल प्रतिबंधित इंजेक्शन, 4 नीडिल (सुई), 5 एमएल ‘Striven’ कंपनी के 2 पीस खाली रैपर और एक मोबाइल बरामद हुआ। मौके से पुलिस ने दूसरे तस्कर हरिनंदन मंडल को गिरफ्तार किया, जो भोगीलाल मंडल का बेटा है। ये दोनों मिलकर युवाओं को नशीले इंजेक्शन बेचने का अवैध नेटवर्क चला रहे थे।
शराब तस्करी का भंडाफोड़
दूसरी बड़ी कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर पिपरा थाना क्षेत्र के केशव नगर वार्ड 9-10 में की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि नेपाल सीमा से लाई गई भारी मात्रा में शराब की खेप को ठिकाने लगाने की तैयारी चल रही है। पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और एक पिकअप वैन (रजिस्ट्रेशन नंबर बीआर 07 GB 9392) को रोका। जांच करने पर पिकअप से 792 लीटर नेपाली सोफी शराब बरामद हुई। पुलिस ने तस्करी में शामिल एक मारुति सुजुकी कार (रजिस्ट्रेशन नंबर बीआर 07 बीपी 5528) को भी जब्त किया। इस मामले में पुलिस ने कुल चार तस्करों को दबोचा। गिरफ्तार तस्करों के नाम और पते इस प्रकार हैं:
- मनीष कुमार: पिता गुरु प्रसाद साह, निवासी केशवनगर वार्ड 10, पिपरा।
- कन्हैया कुमार: निवासी कन्हौली वार्ड 5, झंझारपुर थाना, मधुबनी।
- श्रीराम कुमार: निवासी कन्हौली वार्ड 5, झंझारपुर थाना, मधुबनी।
- महेश महतो: निवासी सखेत वार्ड 4, झंझारपुर थाना क्षेत्र, मधुबनी।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
इस पूरी बड़ी कार्रवाई के बाद पिपरा थाना परिसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। वहां मौजूद पत्रकारों को जानकारी देते हुए ए एसपी सह त्रिवेणीगंज डीएसपी विभाश कुमार और पिपरा थानाध्यक्ष किशोर कुमार ने संयुक्त रूप से पूरे मामले का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस लगातार नशा माफियाओं पर नजर रख रही है और यह कार्रवाई उसी का परिणाम है। स्थानीय स्तर पर खुफिया सूचनाओं को मजबूत करने के कारण ही पुलिस को यह सफलता मिली है।
सीमावर्ती इलाकों में तस्करी
सुपौल जिला भौगोलिक रूप से भारत-नेपाल सीमा के करीब स्थित है। इस सीमावर्ती इलाके का फायदा उठाकर तस्कर अक्सर प्रतिबंधित सामग्री को भारतीय सीमा में प्रवेश कराने की कोशिश करते हैं। नेपाल से आने वाली सस्ती सोफी शराब और आसानी से उपलब्ध होने वाली नशीली दवाएं स्थानीय युवाओं के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं। पिपरा पुलिस ने साफ किया है कि सीमा सुरक्षा और स्थानीय खुफिया तंत्र के साथ मिलकर तस्करों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
मामले में कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तार किए गए सभी छह आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने नशीली सुई के मामले में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट और शराब जब्ती के मामले में बिहार मद्यनिषेध कानून के तहत कार्रवाई की है। रविवार को सभी अभियुक्तों को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। थानाध्यक्ष किशोर कुमार ने बताया कि इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस का खोजी अभियान अभी बंद नहीं हुआ है। पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि यह नशीली दवाएं कहां से लाई जा रही थीं और इनके मुख्य खरीदार कौन थे। इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।







