वाॅशिंगटन,अंग भारत। अमेरिका की तरफ से रूस पर प्रतिबंध लगाने के नए विधेयक को आगे बढ़ाने पर चीन ने चेतावनी दी है कि बीजिंग अपने वैध हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। अमेरिकी सीनेट में रूस के खिलाफ पेश किए गए एक नए ड्राफ्ट कानून के बाद बीजिंग ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इस प्रस्तावित कानून के तहत रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों पर भारी टैक्स लगाने की तैयारी की जा रही है। अमेरिका स्थित चीनी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रकार के एकतरफा और बिना अंतरराष्ट्रीय सहमति वाले प्रतिबंधों का पूरी तरह विरोध करता है। चीन का मानना है कि यह कदम वैश्विक व्यापारिक संबंधों को भारी नुकसान पहुंचाएगा और वह अपने व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
चीनी दूतावास की चेतावनी
वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने मंगलवार को रिया नोवोस्ती को बताया कि अगर अमेरिका मॉस्को के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़ा नया बिल लाता है- जिसके तहत रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने पर ड्यूटी (टैक्स) लगाई जाएगी तो चीन अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। प्रवक्ता लियू चांग ने स्पष्ट किया कि चीन ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करता है जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है या जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी नहीं मिली है। चीनी दूतावास ने अमेरिकी नीतियों पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि किसी भी देश को दूसरे देशों के द्विपक्षीय व्यापार में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। अपने व्यवसाय और नागरिकों के वैध अधिकारों और हितों की मज़बूती से रक्षा करने के लिए चीन अपनी नीतियों के अनुसार कड़े और जवाबी कदम उठाएगा। बीजिंग का मानना है कि आर्थिक प्रतिबंधों का सहारा लेकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना अनुचित है।
नए बिल के प्रावधान
अमेरिका के इस नए कदम के पीछे संसद में पारित हुआ एक हालिया बिल है। पिछले हफ़्ते, अमेरिकी सीनेट ने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम (जिन्हें रूस में आतंकवादी और चरमपंथी माना जाता है) द्वारा पेश किए गए बिल को 86-11 वोटों से मंज़ूरी दी। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और उसके वित्तीय तंत्र पर दबाव बनाना है। इस बिल में रूसी ऊर्जा क्षेत्र को सीधे निशाना बनाया गया है।
इस ड्राफ्ट कानून में कई ऐसे कड़े आर्थिक प्रावधान शामिल किए गए हैं जो न केवल रूस बल्कि उसके साथ व्यापार करने वाले अन्य देशों को भी प्रभावित करेंगे। नीचे दी गई तालिका में इस नए विधेयक के मुख्य बिंदुओं को दर्शाया गया है:
| श्रेणी | प्रस्तावित प्रतिबंध और शुल्क |
|---|---|
| ऊर्जा खरीदारों पर शुल्क | रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर प्रस्तावित टैरिफ को 500 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत करने का प्रावधान है। |
| अमेरिकी आयात पर शुल्क | रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों पर ड्यूटी की दर 500 प्रतिशत तय की जाएगी। |
| लक्षित वित्तीय संस्थान | रूसी सेंट्रल बैंक, स्बेरबैंक, वीटीबी और गैज़प्रोमबैंक के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। |
वित्तीय संस्थानों पर असर
इस कानून के दायरे में रूस के सबसे बड़े बैंकों को रखा गया है। रूसी सेंट्रल बैंक, स्बेरबैंक, वीटीबी और गैज़प्रोमबैंक के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने से अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली प्रभावित होगी। गैज़प्रोमबैंक विशेष रूप से यूरोपीय देशों को रूसी गैस के भुगतान का मुख्य जरिया रहा है। इन बैंकों पर शिकंजा कसने से अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। चीन और रूस के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार में अक्सर इन बैंकों की भागीदारी होती है। इसलिए, चीनी कंपनियां इन नए अमेरिकी प्रतिबंधों के सीधे प्रभाव में आ सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक मोर्चे पर तनातनी बढ़ने की आशंका है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति
रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस निर्यातकों में से एक है। यदि अमेरिका रूसी ऊर्जा के खरीदारों पर 100 प्रतिशत का भारी-भरकम शुल्क लगाता है, तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। भारत और चीन जैसे बड़े विकासशील देश वर्तमान में रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं। इन देशों के लिए सस्ती दरों पर ऊर्जा प्राप्त करना आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। चीन का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रूस के साथ अपना सामान्य व्यापार जारी रखेगा। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।
इस विधेयक से होने वाले संभावित प्रभाव इस प्रकार हैं:
- आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति की अनिश्चितता पैदा होगी।
- द्विपक्षीय व्यापार में गिरावट: प्रतिबंधों के डर से कई देश रूस के साथ सीधे व्यापार करने से कतरा सकते हैं।
- वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों का विकास: अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम करने के लिए चीन और रूस अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ा सकते हैं।
बीजिंग का यह कड़ा रुख साफ करता है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने अपने व्यापारिक समझौतों से समझौता नहीं करेगा। आने वाले समय में यह देखना होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस बिल को कानून के रूप में कैसे लागू करता है और इसके जवाब में चीन अपनी रणनीति में क्या बदलाव लाता है।







