नई दिल्ली,अंग भारत। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केन्द्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह समेत देश के शीर्ष नेतृत्व ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण स्मरण किया। इस विशेष अवसर पर सभी गणमान्य व्यक्तियों ने उनके द्वारा सुशासन, धर्म संरक्षण और जन-कल्याण के क्षेत्र में किए गए कार्यों को नमन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस अवसर पर लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को भी याद किया और उनके संसदीय योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
अहिल्याबाई होल्कर का योगदान
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का नाम भारतीय इतिहास में एक ऐसे शासक के रूप में दर्ज है, जिन्होंने मालवा की समृद्धि के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था। उनका शासनकाल न्याय, करुणा और आर्थिक प्रगति का एक अनूठा संगम था। उनके शासन की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- कृषि विकास: उन्होंने मालवा में किसानों की आय बढ़ाने और खेती की उन्नत तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
- व्यापार प्रोत्साहन: व्यापारियों के लिए सुरक्षित वातावरण और बाजार विकसित किए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में मजबूती आई।
- सांस्कृतिक संरक्षण: देशभर में मंदिरों, घाटों, कुओं और विश्राम-गृहों का निर्माण करवाकर भारत की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखा।
- नारी सशक्तिकरण: उस दौर में महिला शिक्षा और विधवाओं के सम्मान व पुनर्विवाह के लिए साहसी कदम उठाए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि संसद पुस्तकालय भवन के प्रांगण में स्थापित अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है। बिरला ने सोमनाथ चटर्जी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि संसदीय परंपराओं के प्रति उनकी निष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।
नेतृत्व के विचार
केन्द्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह ने अहिल्याबाई होल्कर के जीवन को राष्ट्र-हित के प्रति समर्पण का पर्याय बताया। उन्होंने कहा कि मंदिरों का जीर्णोद्धार हो या तीर्थ स्थलों का पुनरुद्धार, अहिल्याबाई का हर कार्य राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने वाला रहा है। इसी क्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की और उनके आदर्शों को आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक बताया।
अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित आदर्श प्रशासनिक व्यवस्था की नींव आज भी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण की यात्रा को नई दिशा प्रदान कर रही है। — शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याणमंत्री
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याणमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सनातन चेतना का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, देवी अहिल्या ने जिस तरह से धर्म और न्याय को अपनी शासन व्यवस्था का आधार बनाया, वह एक कुशल प्रशासक की पहचान है। वहीं, केन्द्रीय कपड़ामंत्री गिरिराज सिंह ने उन्हें त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि उनके शासन ने पूरी दुनिया को न्याय और करुणा का मार्ग दिखाया है।
विरासत और प्रेरणा
अहिल्याबाई होल्कर का जीवन यह संदेश देता है कि सत्ता का वास्तविक उपयोग जन-सेवा में है। उन्होंने न केवल युद्ध की चुनौतियों का सामना किया, बल्कि आपदा के समय भी आम नागरिक के साथ खड़ी रहीं। उनके द्वारा बनवाए गए जल संसाधन, जैसे बावड़ियां और कुएं, आज भी कई क्षेत्रों में पेयजल की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।
| प्रमुख क्षेत्र | अहिल्याबाई का प्रभाव |
|---|---|
| प्रशासन | न्याय और सुशासन आधारित व्यवस्था |
| संस्कृति | तीर्थ स्थलों का पुनरुद्धार |
| सामाजिक सुधार | महिला शिक्षा और समानता |
| अर्थव्यवस्था | व्यापार और कृषि को प्रोत्साहन |
अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट किया कि उनके विचार आज भी भारतीय लोकतंत्र के आधारस्तंभों के लिए प्रेरणा का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जो ढांचा तैयार किया, वह किसी भी आधुनिक कल्याणकारी राज्य की नींव के समान है। उनकी सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति निष्ठा हमेशा हर भारतीय के हृदय में विद्यमान रहेगी। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट जनों ने उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।







