कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जिसके कारण राज्य के गंगीय और तटीय क्षेत्रों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अलीपुर स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र तथा भारत विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण अगले 48 घंटों में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र विकसित होने जा रहा है। इस मौसमी बदलाव के चलते कोलकाता सहित दक्षिण और उत्तर बंगाल के कई जिलों में तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से 17 अगस्त को गंगीय पश्चिम बंगाल में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
निम्न दबाव का असर
बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तंत्र धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऊपरी वायुमंडल में मौजूद यह परिसंचरण पूरे राज्य के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके असर से अगले दो से तीन दिनों तक राज्य के मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा। इस मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने से जिन प्रमुख जिलों में भारी बारिश का अनुमान है, उनकी सूची इस प्रकार है:
- कोलकाता, हावड़ा और हुगली में मध्यम से तेज बौछारें पड़ सकती हैं।
- उत्तर और दक्षिण 24 परगना में तटीय हवाओं के साथ भारी वर्षा होगी।
- पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर में वज्रपात की गंभीर आशंका जताई गई है।
- झाड़ग्राम, बांकुड़ा और पुरुलिया में आंधी के साथ बारिश का अलर्ट है।
- नदिया, मुर्शिदाबाद और बीरभूम में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी।
- पूर्वी और पश्चिमी बर्दवान में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 16 अगस्त को गंगीय पश्चिम बंगाल में मूसलाधार बारिश शुरू होगी। 17 अगस्त को यह मौसमी सिस्टम अपने चरम पर रहेगा, जिससे कुछ इलाकों में असाधारण रूप से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 18 अगस्त को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश का यह सिलसिला जारी रहेगा.
तटीय क्षेत्रों में चेतावनी
मछुआरों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। 15 से 19 अगस्त के बीच पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्य ओडिशा के तटों से लगे समुद्री क्षेत्रों में मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है।
“समुद्र में जाने वाले मछुआरों को सलाह दी जाती है कि वे 19 अगस्त तक बंगाल की खाड़ी के तटीय और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में न जाएं। प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण नावों के पलटने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।”
— क्षेत्रीय मौसम कार्यालय, अलीपुर
पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, झाड़ग्राम और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में बारिश के साथ तेज गति की हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है क्योंकि वज्रपात से जान-माल के नुकसान का खतरा रहता है।
उत्तर बंगाल का हाल
दक्षिण बंगाल के साथ-साथ उत्तर बंगाल के जिलों में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के कई हिस्सों में लगातार बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 17 अगस्त से उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के जिलों में बारिश की तीव्रता में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा भी बन सकता है, जिससे पहाड़ी रास्तों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने इन पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रियों और निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने की हिदायत दी है।
सुरक्षा और बचाव
लगातार होने वाली मूसलाधार बारिश के कारण शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कोलकाता और उसके आसपास के निचले इलाकों में पानी जमा होने से सड़क यातायात और लोकल ट्रेनों के संचालन में बाधा आने की आशंका है। मौसम विभाग ने स्थानीय नागरिक निकायों को जल निकासी प्रणालियों को सक्रिय रखने और विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।
निम्न तालिका के माध्यम से आगामी दिनों के मौसम और जारी की गई चेतावनियों को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:
| तारीख | प्रभावित क्षेत्र | चेतावनी का प्रकार |
|---|---|---|
| 15-16 अगस्त | तटीय जिले और समुद्री क्षेत्र | मछुआरों को समुद्र में जाने पर रोक, तेज हवाएं |
| 16 अगस्त | गंगीय पश्चिम बंगाल के जिले | भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी |
| 17 अगस्त | कोलकाता, हावड़ा, मेदिनीपुर, झाड़ग्राम | अत्यंत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट |
| 18-19 अगस्त | उत्तर और दक्षिण बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र | तेज बारिश, भूस्खलन और स्थानीय जलभराव का खतरा |
आम नागरिकों के लिए मौसम कार्यालय ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक है:
- सुरक्षित आश्रय लें: जब भी आसमान में बिजली कड़के या तेज आंधी आए, तुरंत किसी पक्के मकान या पक्की छत के नीचे चले जाएं। पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें।
- बिजली उपकरणों का प्रयोग: आंधी-तूफान और वज्रपात के समय घरों के भीतर बिजली के संवेदनशील उपकरणों का उपयोग करने से बचें और उन्हें मुख्य बिजली बोर्ड से अलग कर दें।
- यातायात में सावधानी बरतें: जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरने से बचें क्योंकि वहां गहरे गड्ढे या खुले मैनहोल होने का खतरा रहता है। गिरे हुए तारों से दूरी बनाए रखें।
- आधिकारिक जानकारियों पर भरोसा करें: मौसम में अचानक होने वाले बदलावों से निपटने के लिए रेडियो, टेलीविजन या स्थानीय समाचार माध्यमों से मिलने वाले सरकारी बुलेटिनों पर ही भरोसा करें।
मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि यह मौसमी प्रणाली 19 अगस्त के बाद धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगी, जिसके बाद बारिश की रफ्तार थमेगी। तब तक राज्य के सभी आपातकालीन आपदा प्रबंधन दलों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति का सामना तुरंत किया जा सके।







