नई दिल्ली,अंग भारत। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 290 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में गुरुवार को कोलकाता में 11 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ की जा रही है। ईडी की टीम ने कंपनी के प्रवर्तक प्रशांत बोथरा और विजय बोथरा के अलावा समूह से जुड़े अन्य निदेशकों और ऑडिटरों के परिसरों पर भी तलाशी ली।
झारखंड में बिजली संयंत्र के लिए लिया था कर्ज
ईडी के अनुसार, कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड ने झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए बैंकों से ऋण लिया था। कंपनी ने इस परियोजना के लिए बड़ी रकम बैंकों से जुटाई थी। आरोप है कि कर्ज के तौर पर मिली रकम का इस्तेमाल उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए ऋण लिया गया था।जांच एजेंसी के मुताबिक, ऋण की रकम का एक हिस्सा समूह की दूसरी कंपनियों और कुछ रकम व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए कथित तौर पर स्थानांतरित की गई। इसी आधार पर ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक से मिली रकम कहां-कहां भेजी गई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
एनसीएलटी में पहुंची कंपनी
ईडी के मुताबिक, बाद में कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की प्रक्रिया में चली गई। कंपनी के खिलाफ परिसमापन की कार्रवाई शुरू हुई। इस दौरान बैंकों और अन्य ऋणदाताओं को अपने पैसे की वसूली में काफी नुकसान उठाना पड़ा।जांच एजेंसी का कहना है कि कंपनी की परिसंपत्तियों के निपटारे के बाद बैंकों को करीब सात करोड़ रुपये ही वापस मिल सके। जबकि बैंक से लिया गया ऋण करीब 290 करोड़ रुपये का था। इस तरह ऋणदाताओं को बड़ी रकम का नुकसान हुआ।
प्रवर्तकों और निदेशकों के ठिकानों पर जांच
ईडी के कोलकाता जोनल कार्यालय की ओर से की जा रही मौजूदा कार्रवाई में कंपनी के प्रवर्तकों के साथ-साथ समूह से जुड़े अन्य निदेशकों और ऑडिटरों के परिसरों को भी शामिल किया गया है। एजेंसी की टीम संबंधित कार्यालय परिसरों में भी दस्तावेज और अन्य जानकारी खंगाल रही है।तलाशी के दौरान जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान बैंक से लिए गए ऋण की रकम के कथित दुरुपयोग और उसके लेन-देन पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ऋण की रकम किन कंपनियों या खातों में भेजी गई और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
पैसों के लेन-देन की जांच
ईडी के अधिकारियों के अनुसार, बैंक धोखाधड़ी के मामले में केवल ऋण लेने की प्रक्रिया ही जांच का विषय नहीं है, बल्कि कर्ज की रकम के बाद के प्रवाह को भी देखा जा रहा है। एजेंसी संबंधित कंपनियों, निदेशकों और अन्य लोगों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।जांच के दौरान कंपनी के खातों, ऋण से जुड़े दस्तावेजों और समूह की अन्य कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है। ऑडिटरों से जुड़े परिसरों को तलाशी के दायरे में शामिल किए जाने से जांच का दायरा और बढ़ गया है।
बैंकों को हुआ भारी नुकसान
ईडी की जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि बैंकों से ली गई रकम की वापसी इतनी कम क्यों हुई। कंपनी के परिसमापन के बाद करीब सात करोड़ रुपये की वसूली हुई, जबकि ऋण की रकम करीब 290 करोड़ रुपये बताई गई है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम की वसूली क्यों नहीं हो सकी और ऋण की राशि का कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल किया गया।कोलकाता में एक साथ 11 ठिकानों पर हुई कार्रवाई से मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, तलाशी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली, इसकी विस्तृत जानकारी ईडी की ओर से फिलहाल साझा नहीं की गई है। एजेंसी की कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं और रकम के लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच के तहत जारी है।







