सुपौल,अंग भारत। जिले में खेल प्रतिभाओं को सामने लाने और बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए 02 अक्टूबर 2026 से विद्यालय स्तर पर ‘मशाल खेल कार्यक्रम’ की शुरुआत की जाएगी। खेल विभाग के निर्देश के तहत आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और जमीनी स्तर पर छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना है।कार्यक्रम के जरिए विद्यालयों और पंचायतों से अधिक से अधिक बच्चों को खेल प्रतियोगिताओं में शामिल किया जाएगा। इससे न केवल बच्चों में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी, बल्कि अलग-अलग खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
छातापुर में तैयारियों को लेकर हुई बैठक
कार्यक्रम की तैयारियों और इसके प्रभावी संचालन को लेकर बुधवार को छातापुर प्रखंड सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपाधीक्षक, शारीरिक शिक्षा, सुपौल ने की। इसमें कार्यक्रम को विद्यालय और पंचायत स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक में अधिकारियों ने कहा कि प्रतियोगिताओं में ज्यादा से ज्यादा बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही विद्यालय स्तर पर प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें आगे की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाए। गांव-गांव और विद्यालय-विद्यालय तक कार्यक्रम की जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
पांच चरणों में होंगी प्रतियोगिताएं
‘मशाल खेल कार्यक्रम’ के तहत प्रतियोगिताओं का आयोजन पांच चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 02 अक्टूबर 2026 से इंट्रा-स्कूल स्तर पर प्रतियोगिताएं शुरू होंगी। इसके बाद दिसंबर 2026 में CRC स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।जनवरी 2027 में प्रखंड स्तर पर, फरवरी 2027 में जिला स्तर पर और मार्च 2027 में राज्य स्तर पर प्रतियोगिताएं होंगी। इस तरह विद्यालय से शुरू होने वाला यह खेल अभियान राज्य स्तर तक पहुंचेगा।इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को लगातार आगे बढ़ने का मौका मिले और वे बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
पांच खेलों में मिलेगा बच्चों को मौका
कार्यक्रम में एथलेटिक्स, साइक्लिंग, कबड्डी, फुटबॉल और वॉलीबॉल को शामिल किया गया है। एथलेटिक्स में रनिंग और लॉन्ग जंप की प्रतियोगिताएं होंगी। इसमें U-14 और U-16 आयु वर्ग के बच्चों को अवसर दिया जाएगा।साइक्लिंग में 3 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। वहीं कबड्डी में 7×7, फुटबॉल में 5×5 और वॉलीबॉल में 6×6 प्रारूप में मुकाबले कराए जाएंगे।इन खेलों के चयन से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अपनी पसंद के खेल में प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। खासकर कबड्डी, फुटबॉल और वॉलीबॉल जैसे खेलों में गांवों के बच्चों की पहले से ही अच्छी रुचि रही है।
BSSA देगा तकनीकी सहयोग
‘मशाल खेल कार्यक्रम’ का आयोजन शिक्षा विभाग की ओर से बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) के तकनीकी सहयोग से किया जाएगा। जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन में BSSA की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।तकनीकी सहयोग के जरिए प्रतियोगिताओं को बेहतर तरीके से आयोजित करने और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सही तरीके से परखने का प्रयास किया जाएगा। इससे प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
गांव-गांव से प्रतिभाओं की होगी तलाश
बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कार्यक्रम केवल कुछ चुनिंदा विद्यालयों तक सीमित न रहे। पंचायत और विद्यालय स्तर पर अधिक से अधिक बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी सामने आ सकें।अक्सर गांवों में बेहतर खिलाड़ी होने के बावजूद उचित मंच नहीं मिलने के कारण उनकी प्रतिभा सामने नहीं आ पाती। ‘मशाल खेल कार्यक्रम’ के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें जिला और राज्य स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
उभरते खिलाड़ियों को मिलेगा नया मंच
अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जिले में खेल का माहौल मजबूत होगा। विद्यालय स्तर से प्रतिभाओं की पहचान होने के बाद उन्हें लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।‘मशाल खेल कार्यक्रम’ के माध्यम से गांव-गांव और विद्यालय-विद्यालय से खिलाड़ियों की तलाश कर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इससे बिहार के उभरते खिलाड़ियों को नई पहचान मिलने के साथ खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल सकेगा।







