तेहरान,अंग भारत। ईरान और फ्रांस के बीच जुबानी जंग फिर तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को उनके ही पुराने बयान पर घेर लिया है। मामला ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है।फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने हाल में एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि फ्रांस ने हमेशा से ही ईरान में किसी भी तरह की परमाणु गतिविधि का विरोध किया है। यानी उनका कहना था कि ईरान को परमाणु बम या परमाणु से जुड़ा कोई भी काम नहीं करना चाहिए और फ्रांस शुरू से इसके खिलाफ रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तुरंत सोशल मीडिया X पर मैक्रों को जवाब दिया और उनके 7 साल पुराने बयान की याद दिला दी।अराघची ने कहा कि मैक्रों साहब, आप दो तरह की बात कर रहे हैं। 2018 में आप कुछ और बोल रहे थे और अब कुछ और बोल रहे हैं। अपनी बात साफ करो।उन्होंने मैक्रों के 25 अप्रैल 2018 वाले भाषण का हवाला दिया। वो भाषण मैक्रों ने अमेरिका की संसद यानी अमेरिकी कांग्रेस में दिया था।
उस समय ईरान का परमाणु समझौता टूटने वाला था। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस समझौते से बाहर निकलने वाले थे।उस वक्त मैक्रों ने उसी कांग्रेस में खड़े होकर ईरान परमाणु समझौते का जोरदार समर्थन किया था। उस समझौते को जेसीपीओए कहा जाता है।
इसका पूरा नाम है जॉइंट कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन। ये समझौता 2015 में हुआ था। एक तरफ ईरान था और दूसरी तरफ 6 बड़ी ताकतें थीं – अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी।इस समझौते में तय हुआ था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित रखेगा, उसकी जांच होने देगा और बदले में उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे। पूरी दुनिया ने कहा था कि ये बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है।मैक्रों ने 2018 में कहा था कि फ्रांस इस समझौते पर टिका रहेगा, क्योंकि फ्रांस ने इस पर दस्तखत किए हैं। उन्होंने कहा था कि बिना किसी दूसरे विकल्प के इस समझौते को छोड़ना ठीक नहीं होगा। मतलब उस समय मैक्रों ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कंट्रोल करने के लिए उसी समझौते को जरूरी बता रहे थे, न कि पूरी तरह से खत्म करने की बात।
अराघची ने अपने पोस्ट में लिखा, “2018 में अमेरिका के समझौते से निकलने से ठीक पहले, आपने अमेरिकी कांग्रेस में जोर देकर कहा था कि फ्रांस जेसीपीओए नहीं छोड़ेगा। और अब आप कह रहे हैं कि आपने हमेशा ईरान में किसी भी परमाणु गतिविधि का विरोध किया है।”उन्होंने मैक्रों के उस पुराने भाषण के स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किए ताकि दुनिया देख सके कि मैक्रों पहले क्या बोलते थे।अब अराघची का सीधा सवाल है – मिस्टर प्रेसिडेंट, आप अपना स्टैंड क्लियर कीजिए। आप उस समझौते के साथ हैं या आप चाहते हैं कि ईरान में कोई भी परमाणु काम, चाहे वो बिजली बनाने के लिए ही क्यों न हो, बंद हो जाए।
आपको बता दें कि मई 2018 में ट्रंप ने सच में अमेरिका को उस समझौते से बाहर निकाल लिया था। उसके बाद से ईरान ने भी कहना शुरू कर दिया कि जब अमेरिका ही समझौता नहीं मान रहा तो हम क्यों मानें। तब से ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से तेज कर दिया और तभी से तनाव बढ़ता जा रहा है।अब ईरान के इस हमले के बाद एक बार फिर दुनिया में बहस छिड़ गई है कि पश्चिमी देशों की ईरान को लेकर नीति आखिर है क्या। क्या वो बातचीत से हल चाहते हैं या सिर्फ दबाव बनाना चाहते हैं।








