रजौन/बांका/अंग भारत। बिहार में सरकार द्वारा अगस्त 2025 से प्रति माह 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा के बाद उम्मीद थी कि बिजली चोरी के मामलों में कमी आएगी, लेकिन रजौन (बांका) में जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। मुफ्त बिजली की सुविधा मिलने के बावजूद इलाके में बिजली चोरी का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) की सख्ती के बावजूद मार्च महीने में ढाई दर्जन से अधिक लोगों को अवैध रूप से बिजली का उपयोग करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत न केवल केस दर्ज हुआ है, बल्कि उन पर भारी-भरकम जुर्माना भी ठोका गया है।
अभियान और सख्त कार्रवाई
बिजली विभाग ने अब इस समस्या से निपटने के लिए कमर कस ली है। रजौन विद्युत अवर प्रमंडल के सहायक विद्युत अभियंता (SDO) बिजेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया है। कनीय अभियंता (JE) अमरजीत चंद्रा इस अभियान को जमीनी स्तर पर लीड कर रहे हैं। विभाग की रणनीति स्पष्ट है: कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। छापेमारी का मुख्य केंद्र उन इलाकों को बनाया गया है जहाँ से बिजली विभाग को लगातार मीटर बाईपास करने या कटिया डालकर बिजली जलाने की सूचनाएं मिल रही थीं।
पकड़े गए उपभोक्ता और जुर्माना
मार्च के पिछले कुछ हफ़्तों में विभाग द्वारा की गई छापेमारी ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार:
- कुल ढाई दर्जन (30 से अधिक) उपभोक्ताओं पर FIR दर्ज की गई है।
- बिजली अधिनियम की धारा 135 का उपयोग करते हुए कानूनी कार्रवाई की गई है।
- जुर्माने की राशि चोरी की गई बिजली की खपत और उपकरणों के लोड के आधार पर तय की गई है।
- कई मामलों में भारी जुर्माना होने के बावजूद उपभोक्ता आदतों से मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
अधिकारियों की सख्त चेतावनी
एसडीओ बिजेंद्र कुमार का कहना है कि विभाग का मुख्य उद्देश्य बिजली चोरी को पूरी तरह से जड़ से खत्म करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुफ्त बिजली का मतलब यह नहीं है कि कोई भी अपनी मर्जी से सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करे। वहीं, जेई अमरजीत चंद्रा ने भी उपभोक्ताओं को चेतावनी दी है कि छापेमारी का यह दायरा अब और विस्तृत होने वाला है। उनका मानना है कि जो लोग समय पर बिल का भुगतान नहीं कर रहे या अवैध कनेक्शन का उपयोग कर रहे हैं, उनकी पहचान अब विभाग के रडार पर है।
बिजली चोरी के घातक परिणाम
बिजली चोरी केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के सामान्य उपभोक्ताओं के लिए भी समस्या का सबब बनता है। जब लोग कटिया मारकर बिजली जलाते हैं, तो इसके कई गंभीर परिणाम सामने आते हैं:
- लो वोल्टेज की समस्या: अवैध कनेक्शन के कारण ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड पड़ता है, जिससे आसपास के वैध उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज झेलना पड़ता है।
- आग लगने का खतरा: असुरक्षित तरीके से किए गए अवैध कनेक्शनों के कारण शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ती हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।
- उपकरणों को नुकसान: वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव के कारण घरों में लगे फ्रिज, टीवी और पंखे जैसे महंगे उपकरण जल्दी खराब हो जाते हैं।
भविष्य की रणनीति
आने वाले दिनों में रजौन में बिजली चोरी रोकने के लिए विभाग स्मार्ट मीटरिंग और तकनीक का सहारा लेने की योजना बना रहा है। तकनीकी हस्तक्षेप से मानव हस्तक्षेप कम होगा और चोरी पकड़ना और भी आसान हो जाएगा। विभाग की यह कोशिश है कि ईमानदार उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली मिले और चोरी करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण बना रहे। आने वाले समय में बिजली विभाग ने अपनी छापेमारी टीम की संख्या बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं।
“बिजली विभाग का यह अभियान उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी नियमों को नजरअंदाज करते हैं। मुफ्त बिजली की सुविधा उन जरूरतमंदों के लिए है जो इसका सही इस्तेमाल करते हैं, न कि उन लोगों के लिए जो सिस्टम में सेंध लगाकर विभाग को नुकसान पहुँचाते हैं।”
स्थानीय लोग अब विभाग के इस रुख पर दो भागों में बंट गए हैं। जहाँ एक तबका इसे सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहा है, वहीं कुछ लोग अभी भी इसे लेकर सतर्क हैं। देखना यह होगा कि क्या इस सख्ती के बाद बिजली चोरी के आंकड़ों में कमी आती है या विभाग को और भी सख्त तेवर अपनाने पड़ते हैं।








