मॉस्को, अंग भारत। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण संघर्ष अब एक नए और अधिक विस्फोटक चरण में प्रवेश कर गया है। 9 मई को रूस में मनाए जाने वाले ऐतिहासिक विजय दिवस (Victory Day) समारोह से ठीक पहले, यूक्रेन ने रूसी सरजमीं पर अपने अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों को अंजाम देकर सुरक्षा तंत्र की नींद उड़ा दी है। यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि रूस के उस गौरवशाली दिन को प्रभावित करने की एक रणनीतिक कोशिश है, जिसे रूस अपने राष्ट्रीय सम्मान के तौर पर देखता है। मॉस्को और उसके आसपास के इलाकों में हवाई सुरक्षा प्रणालियों को पूरी रात सतर्क रहना पड़ा, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।
ड्रोन हमलों की गंभीरता
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि यूक्रेन ने एक साथ 20 से अधिक रूसी क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए भारी संख्या में ड्रोन भेजे थे। रूस ने आधिकारिक तौर पर 347 यूक्रेनी ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए मार गिराने का दावा किया है। युद्ध की विभीषिका के बीच यह संख्या काफी चौंकाने वाली है, क्योंकि मार्च महीने में दर्ज किए गए 389 ड्रोनों के बाद यह सबसे बड़ा हमला है।
- यूक्रेन द्वारा 20 से अधिक रूसी राज्यों को निशाना बनाना।
- रूस के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा 347 ड्रोन को हवा में नष्ट करना।
- एकतरफा सैन्य विराम की घोषणा के बावजूद हमलों का जारी रहना।
हवाई यातायात और असर
ड्रोन हमलों का सीधा असर आम नागरिकों और उनकी आवाजाही पर पड़ा है। मॉस्को के प्रमुख हवाई अड्डों—शेरेमेत्येवो, डोमोडेडोवो और वनुकोवो—में सुरक्षा के मद्देनजर लगभग 100 उड़ानों को रद्द करना पड़ा या देरी से संचालित किया गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राजधानी के आसपास की हवाई सीमा को पूरी तरह से निगरानी के दायरे में लाना पड़ा। दूसरी ओर, यूक्रेन के खारकीव शहर में भी रूस ने जवाबी कार्रवाई के तहत 102 ड्रोन छोड़े, जिनमें से 92 को यूक्रेन ने मार गिराने का दावा किया है। इन हमलों के बीच आम जनता, विशेषकर बच्चों और निर्दोष नागरिकों का जीवन दांव पर लगा है।
समारोह पर मंडराता खतरा
विजय दिवस पर 9 मई को रूस अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करता है, लेकिन इस बार का परिदृश्य बिल्कुल अलग है। सुरक्षा एजेंसियों ने मॉस्को में मोबाइल इंटरनेट और मैसेजिंग सेवाओं तक को अस्थाई रूप से प्रतिबंधित करने की योजना बनाई है ताकि किसी भी डिजिटल घुसपैठ या हमले के समन्वय को रोका जा सके। परेड में टैंकों और मिसाइलों के प्रदर्शन को भी सीमित रखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्रेमलिन मौजूदा सुरक्षा खतरों को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
“हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी प्रकार की विघटनकारी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,” क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि यदि समारोह में बाधा उत्पन्न की गई, तो कीव को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
क्षेत्रीय तनाव का दायरा
इस युद्ध ने अब पड़ोसी देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। एक नया विवाद तब खड़ा हुआ जब रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन ने सेंट पीटर्सबर्ग क्षेत्र पर हमले के लिए लातविया के हवाई क्षेत्र का दुरुपयोग किया है। वहीं, लातविया ने पलटवार करते हुए कहा है कि वास्तव में रूस के ही कुछ ड्रोन उनके क्षेत्र में गिरे हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाल्टिक क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
भविष्य की अनिश्चितता
रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह ड्रोन युद्ध स्पष्ट करता है कि तकनीक अब भविष्य की लड़ाइयों का आधार बन चुकी है। परंपरागत तोपों और मिसाइलों की जगह अब सस्ते लेकिन प्रभावी ड्रोन ले रहे हैं, जिन्हें ट्रैक करना और रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि विजय दिवस का आयोजन रूस की सहनशक्ति और उसकी सुरक्षा नीतियों की असली परीक्षा साबित होने वाला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है, क्योंकि इस तनाव के आगे बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।








