गुवाहाटी,अंग भारत। असम में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। शनिवार को गुवाहाटी के अटल बिहारी वाजपेयी भवन में एनडीए विधायक दल की बैठक आयोजित की गई है, जिसमें सर्वसम्मति से नेता का चुनाव किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही एनडीए प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का आधिकारिक दावा पेश करेगा, जो राज्य में स्थिरता और विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है।
विधायक दल की बैठक
भाजपा मुख्यालय में आज सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल है। पार्टी के झंडे, बैनर और समर्थकों की भीड़ ने वाजपेयी भवन को पूरी तरह से राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया है। एनडीए के घटक दलों के विधायक यहां पहुंच चुके हैं। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य औपचारिक रूप से उस चेहरे पर मुहर लगाना है, जो अगले पांच साल तक असम की कमान संभालेगा।
पर्यवेक्षकों की भूमिका
पार्टी आलाकमान ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए केंद्रीय स्तर के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा राष्ट्रीय पर्यवेक्षक के रूप में गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। उनके साथ उप-पर्यवेक्षक के तौर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद हैं। इन दिग्गजों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि नेतृत्व चयन की प्रक्रिया सुचारू और सर्वसम्मत रहे। अक्सर ऐसे मौकों पर पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता का संदेश देना ही प्राथमिकता होती है।
जनादेश का विश्लेषण
हाल ही में संपन्न हुए 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया कि जनता ने एनडीए के कामकाज पर भरोसा जताया है। असम की 126 विधानसभा सीटों में से गठबंधन की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): 82 सीटें
- असम गण परिषद (अगप): 10 सीटें
- बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ): 10 सीटें
- कुल एनडीए: 102 सीटें
यह प्रचंड बहुमत न केवल सत्ता की वापसी सुनिश्चित करता है, बल्कि सरकार को कड़े नीतिगत फैसले लेने का जनादेश भी देता है। विपक्ष के लिए इस बार राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है, जबकि एनडीए ने अपने आधार को और अधिक विस्तार दिया है।
शपथ ग्रहण समारोह
सरकार गठन की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, 12 मई को गुवाहाटी के खानापाड़ा खेल मैदान में शपथ ग्रहण का भव्य कार्यक्रम रखा गया है। इस दिन का इंतजार न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं को है, बल्कि उन आम नागरिकों को भी है जो नई कैबिनेट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि यह आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
विकास की उम्मीदें
असम की जनता अब नई सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा रखती है। चुनावी रैलियों में जिन मुद्दों पर जोर दिया गया था, वे अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर सरकार का ध्यान केंद्रित रहने की संभावना है:
- बुनियादी ढांचा: सड़कों और पुलों का जाल बिछाने का काम तेज करना।
- रोजगार: युवाओं के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में अवसर पैदा करना।
- कनेक्टिविटी: पूर्वोत्तर को देश के शेष हिस्सों से बेहतर ढंग से जोड़ना।
- कल्याणकारी योजनाएं: निचले स्तर तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना।
पूर्वोत्तर में प्रभाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम में भाजपा की लगातार दूसरी या तीसरी बड़ी जीत पूर्वोत्तर भारत में पार्टी की धमक को और भी गहरा कर रही है। जब किसी एक गठबंधन को लगातार स्थिर जनादेश मिलता है, तो राज्य में विकास की गति तेज होती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपनी टीम का चयन कैसे करती है और मंत्रिमंडल में किन नए चेहरों को स्थान मिलता है।
सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गुवाहाटी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। भीड़ को नियंत्रित करने और वीआईपी मूवमेंट को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने खास रूट चार्ट तैयार किए हैं। कुल मिलाकर, असम का राजनीतिक पारा अब ठंडा होने वाला है और राज्य शासन की नई पारी का आगाज होने जा रहा है।








