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विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त, भागलपुर बस स्टैंड वीरान

भागलपुर, अंग भारत। भागलपुर का विक्रमशिला सेतु इस समय शहर की जीवनरेखा के बजाय एक बड़े संकट का केंद्र बन गया है, जिसके क्षतिग्रस्त होने की सीधी मार स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर पड़ी है। सेतु पर यातायात बाधित होने से भागलपुर का मुख्य सरकारी बस स्टैंड पूरी तरह वीरान हो चुका है, जहां कभी सैकड़ों बसें और हजारों यात्रियों का रेला लगा रहता था, आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। यह स्थिति न केवल परिवहन के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए भी आर्थिक संकट का कारण बन गई है जो बस स्टैंड की गतिविधियों पर निर्भर थे।

परिवहन व्यवस्था पर असर

विक्रमशिला सेतु भागलपुर को उत्तर बिहार के सीमांचल और पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र प्रमुख जरिया है। सेतु में खराबी आने के बाद से ही परिचालन की कमर टूट चुकी है। इसका सबसे बुरा असर निम्नलिखित रूटों पर देखा जा रहा है:

  • पूर्णिया और सिलीगुड़ी: लंबी दूरी की ये सेवाएँ अब लगभग बंद हैं, जिससे उत्तर बंगाल और बिहार के बीच सीधा संपर्क कट गया है।
  • कटिहार और बेगूसराय: दैनिक यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
  • निजी ऑपरेटरों की हताशा: बस मालिकों का कहना है कि वैकल्पिक मार्गों की दूरी बहुत अधिक है, जिससे ईंधन का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

यात्रियों की भारी परेशानी

सबसे ज्यादा मुसीबत उन लोगों की है, जिन्हें इलाज, पढ़ाई या व्यापार के लिए रोजाना इन शहरों के बीच यात्रा करनी पड़ती है। एक स्थानीय यात्री ने साझा किया कि अब उन्हें ट्रेन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर महंगे निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। समय की बर्बादी अलग, जेब पर अतिरिक्त बोझ ने आम आदमी को बुरी तरह तोड़ दिया है। जो यात्रा पहले कुछ घंटों में पूरी हो जाती थी, अब उसके लिए पूरा दिन निकल जा रहा है।

व्यापारियों का गहरा संकट

बस स्टैंड के इर्द-गिर्द अपनी छोटी-छोटी दुकानें चलाने वाले दुकानदारों का हाल सबसे बेहाल है। उनका कहना है कि आज का सन्नाटा तो कोरोना लॉकडाउन के दिनों से भी अधिक डरावना है। तब भी इक्का-दुक्का लोग निकल रहे थे, लेकिन अब तो बस स्टैंड ही पूरी तरह से वीरान है।

दुकानदारों के अनुसार, “दुकान खोलकर बैठने का मतलब है केवल बिजली का बिल और अपना समय गवाना। दिन भर में ग्राहक का चेहरा देखने को नहीं मिलता।”

प्रशासन से उम्मीदें

भागलपुर के नागरिक अब एक स्वर में जिला प्रशासन और सेतु निगम से इस पुल की तत्काल मरम्मत की मांग कर रहे हैं। विक्रमशिला सेतु पर भार कम करने और मरम्मत कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि बड़े वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हो सके। लोगों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो भागलपुर का व्यापारिक जगत लंबे समय तक मंदी की चपेट में रहेगा।

आगे की राह क्या?

स्थिति को सामान्य करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाना समय की मांग है:

  • युद्धस्तर पर मरम्मत: सेतु के कमजोर हिस्सों की तुरंत पहचान और तकनीकी सुधार की जरूरत है।
  • वैकल्पिक मार्ग सुगम बनाना: जब तक मरम्मत पूरी नहीं होती, प्रशासन को वैकल्पिक रास्तों पर बेहतर यातायात प्रबंधन करना चाहिए।
  • यात्री सुविधा केंद्र: यात्रियों को कम से कम टिकट और आवाजाही के लिए स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

फिलहाल, भागलपुर का बस स्टैंड प्रशासन की ओर से मिलने वाली एक सकारात्मक खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। सेतु की मरम्मत ही एकमात्र रास्ता है जिससे यह शहर वापस अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ पाएगा और बस स्टैंड की रौनक लौट सकेगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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