भागलपुर,अंग भारत। बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड में निर्माणाधीन अडानी थर्मल पावर प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में अब आदिवासी समाज के लोगों ने प्रखंड प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें धमकी दी जा रही है और इलाके में भय का माहौल बनाया जा रहा है।आदिवासी समाज के लोगों का आरोप है कि पीरपैंती प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और शेरमारी सिमानपुर पंचायत के सरपंच वरुण गोस्वामी द्वारा उन्हें धमकाया गया। एक पीड़ित महिला ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया कि “अगर रहना है तो इसी घर में रहो, नहीं तो जहां जाना है चले जाओ।” इस कथित बयान के बाद ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
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ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश, प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी से सुरक्षा और सहयोग की उम्मीद की जाती है, वही अगर दबाव और धमकी की भाषा इस्तेमाल करें तो आम जनता के लिए स्थिति बेहद कठिन हो जाती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अडानी पावर थर्मल प्लांट से जुड़े मामलों को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।इस पूरे मामले के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। आदिवासी समाज के लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे शांत नहीं बैठेंगे।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया नहीं आई
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी या पंचायत प्रतिनिधि की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों पर चुप्पी के कारण मामला और भी संवेदनशील होता जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना से जुड़ी गतिविधियों के कारण पहले से ही कई तरह की असुविधाएं हो रही हैं, और अब कथित धमकी के आरोपों ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
जांच की मांग तेज, इलाके में तनाव बरकरार
आदिवासी समाज ने साफ कहा है कि जब तक इस मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तब तक वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।फिलहाल पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और लोग प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद न रहकर बड़े प्रशासनिक सवालों को भी जन्म दे रहा है।










