काठमांडू,अंग भारत। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत से आने वाले तीर्थयात्रियों का नेपाल पहुंचना शुरू हो गया है। कोविड-19 के बाद दोबारा खुले नेपाल-हिल्सा मार्ग से इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। बीते चार दिनों में 169 भारतीय तीर्थयात्रियों ने नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने के लिए पंजीकरण कराया है। इसके अलावा 22 विदेशी नागरिक भी यात्रा के लिए यहां पहुंचे हैं।तीर्थयात्री नेपाल के पश्चिमी क्षेत्र नेपालगंज से हवाई मार्ग के जरिए सिमकोट पहुंच रहे हैं और वहां से आगे हिल्सा भेजे जा रहे हैं। हिल्सा को चीन के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। मौसम अनुकूल रहने पर यात्रियों को तेजी से आगे भेजा जा रहा है।
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सिमकोट एयरपोर्ट प्रमुख महेन्द्र सिंह ने बताया कि 14 मई से अब तक लगातार यात्री पहुंच रहे हैं। खराब मौसम के बावजूद शनिवार को समिट एयर की तीन उड़ानों के माध्यम से 47 तीर्थयात्री सिमकोट पहुंचे। रविवार को मौसम में सुधार होने के बाद यात्रियों की आवाजाही और तेज कर दी गई है। प्रशासन और विमानन कंपनियां यात्रियों को सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचाने में जुटी हुई हैं।हालांकि कुछ विदेशी यात्रियों को जरूरी परमिट नहीं होने की वजह से आगे की यात्रा जारी रखने की अनुमति नहीं मिल सकी। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण उन्हें वापस भेजना पड़ा। प्रशासन ने यात्रियों से सभी जरूरी अनुमति पत्र और यात्रा संबंधी दस्तावेज पहले से तैयार रखने की अपील की है ताकि यात्रा में किसी प्रकार की परेशानी न हो।नेपाल के पर्यटन और स्थानीय प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। पिछले वर्ष चीन द्वारा मार्ग खोले जाने के बाद करीब 6,500 भारतीय श्रद्धालुओं ने नेपाल के हिल्सा मार्ग से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी की थी।इस वर्ष 14 मई से आधिकारिक तौर पर यात्रा सीजन शुरू हो चुका है। यात्रा एजेंसियों और स्थानीय कारोबारियों को भी इस सीजन से अच्छी आर्थिक गतिविधियों की उम्मीद है। नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में होटल, हवाई सेवा और स्थानीय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं।











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