दोहा/तेहरान/वाशिंगटन,अंग भारत। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने ईरानी मिसाइल ठिकानों और समुद्री माइंस बिछाने वाली नौकाओं पर हवाई हमला कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई है जब कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को सुधारने के लिए अहम वार्ता जारी है। अमेरिकी सैन्य कमांड (सेंटकॉम) ने इस हमले को सीधे तौर पर ‘आत्मरक्षा’ करार दिया है, जबकि तेहरान की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया की आशंका जताई जा रही है।
हमले के पीछे के कारण
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि की है। प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के मुताबिक, यह हमला अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे खुफिया जानकारी थी। खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले थे कि मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सुरक्षा बलों पर ईरान एक बड़े हमले की योजना बना रहा था। इनपुट मिलते ही अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति बदली और होर्मुज जलडमरूमध्य में सक्रिय उन बोट्स को निशाना बनाया, जो समुद्र में बारूदी माइंस बिछाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं।
होर्मुज की सामरिक महत्ता
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्ग है। यहाँ से हर दिन लाखों बैरल तेल गुजरता है। इस मार्ग पर कोई भी गतिविधि वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधा प्रभावित करती है।
- तेल आपूर्ति: खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल इसी रास्ते से होकर जाता है।
- समुद्री सुरक्षा: माइंस बिछाने का मतलब है अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को ठप करना।
- रणनीतिक दबाव: अमेरिका का तर्क है कि वह किसी भी हाल में इस समुद्री गलियारे को ‘ब्लॉक’ नहीं होने देगा।
शांति वार्ता का भविष्य
हैरानी की बात यह है कि मिसाइलें चलने के बावजूद कतर में कूटनीतिक बातचीत रुकी नहीं है। कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी लगातार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ईरान की ओर से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची शामिल हैं, वार्ता में सक्रिय हैं। यह वार्ता मुख्य रूप से परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम के निपटान पर केंद्रित है।
ट्रम्प प्रशासन की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस पूरे मसले पर काफी आशान्वित दिख रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान के साथ एक बड़ा समझौता संभव है। ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को या तो अमेरिका को सौंप दे या उसे किसी तटस्थ स्थान पर नष्ट किया जाए। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि बातचीत के कुछ जटिल बिंदुओं पर अभी भी आम सहमति नहीं बन पाई है।
प्रमुख चुनौतियां और उम्मीदें
| मुद्दा | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| सैन्य टकराव | सेंटकॉम का हमला (आत्मरक्षा का दावा) |
| कूटनीतिक वार्ता | दोहा में लगातार जारी |
| परमाणु मुद्दा | संवर्धित यूरेनियम पर गतिरोध |
मौजूदा हालात में अमेरिका और ईरान के बीच ‘बातचीत और बमबारी’ का यह दोहरा खेल दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। एक तरफ सैन्य बल अपनी शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीतिज्ञ मेज पर शांति तलाश रहे हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है या शांति का कोई नया रास्ता निकलेगा।








