नई दिल्ली, अंग भारत। जून के महीने से हवाई यात्रियों की राह थोड़ी मुश्किल होने वाली है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइनों ने अगले तीन महीनों यानी जून से अगस्त तक अपनी उड़ानों में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की आसमान छूती कीमतों ने एयरलाइंस के परिचालन खर्च को इतना बढ़ा दिया है कि उनके पास उड़ानों को कम करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। यदि आप आने वाले समय में कहीं घूमने या काम के सिलसिले में जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है क्योंकि टिकटों की कमी और कीमतों में उछाल की पूरी संभावना है।
उड़ानों में बड़ी कटौती
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अपनी परिचालन लागत को संतुलित करने के लिए घरेलू उड़ानों में 22 फीसदी की भारी कटौती की है। स्थिति यहीं नहीं रुकती, अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी एयर इंडिया करीब 27 फीसदी कम उड़ानें संचालित करेगी। एयर इंडिया हर हफ्ते औसतन 4,400 उड़ानें भरती है, जिनमें 3,600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। इस बड़े बदलाव के बाद अब यात्रियों को पहले की तुलना में कम विकल्प मिलेंगे। कंपनी ने साफ किया है कि ईंधन के बढ़ते दाम मुनाफा कम कर रहे हैं, जिससे बचने के लिए यह कदम उठाना मजबूरी है।
तीन महीने का समय
यह निर्णय 1 जून से प्रभावी हो चुका है और अगले 90 दिनों तक लागू रहेगा। एयर इंडिया का कहना है कि वे लगातार बाजार की मांग और ईंधन की कीमतों पर नजर रख रहे हैं। अगर स्थिति में सुधार होता है, तो उड़ानों को दोबारा बहाल किया जा सकता है। हालांकि, एयरलाइंस ने प्रभावित यात्रियों के लिए कुछ राहत भरी बातें भी कही हैं:
- जिनकी फ्लाइट्स रद्द हुई हैं, उन्हें दूसरी उड़ानों में समायोजित किया जाएगा।
- बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्री अपनी यात्रा की तारीख बदल सकते हैं।
- टिकट कैंसिल करने पर पूरा रिफंड लेने का विकल्प भी दिया जा रहा है।
इंडिगो की नई रणनीति
भारत की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो ने भी इस मुश्किल घड़ी में संभलकर चलने का फैसला लिया है। कंपनी अपनी कुल क्षमता में 5 से 7 फीसदी की कटौती करेगी। इंडिगो का मुख्य फोकस उन रूट्स पर है जहां मांग कम है। हालांकि इंडिगो ने अभी तक अपने पूरे रूट प्लान का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उद्योग के जानकार मानते हैं कि कंपनी अपने लाभप्रद मार्गों पर ही ध्यान केंद्रित करेगी और कम चलने वाली सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर देगी।
यात्रियों पर असर
हवाई यात्रियों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो उड़ानों की संख्या कम होने का मतलब है कि हवा में सीटों की सप्लाई कम हो जाएगी। अर्थशास्त्र का सीधा सा नियम है कि जब सप्लाई घटती है और मांग स्थिर रहती है, तो कीमतें बढ़ती हैं।
| प्रभाव | यात्री क्या उम्मीद करें |
|---|---|
| टिकट दरें | अंतिम समय में बुकिंग पर काफी महंगा टिकट मिल सकता है। |
| उपलब्धता | सीटें जल्दी भर जाएंगी, इसलिए एडवांस बुकिंग ही एक रास्ता है। |
| समय | फ्लाइट्स के समय में बदलाव हो सकते हैं, अपना पीएनआर स्टेटस चेक करते रहें। |
सावधानी बरतें यात्री
अगले तीन महीनों में हवाई यात्रा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मेरा सुझाव है कि यदि आप अगस्त तक कहीं जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी बुकिंग अभी से पक्की कर लें। ऐन वक्त पर एयरपोर्ट पहुंचना और वहां जाकर पता चलना कि फ्लाइट कैंसिल है, आपकी पूरी यात्रा का मजा किरकिरा कर सकता है। एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट या उनके मोबाइल ऐप के नोटिफिकेशन को नजरअंदाज न करें। अगर कोई बदलाव होता है, तो वे आपको ईमेल या एसएमएस के जरिए सूचित करेंगे। थोड़ी सी सतर्कता आपको हवाई अड्डे पर होने वाली भारी असुविधा से बचा सकती है।








