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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एम.के. स्कूल में दिखा उत्साह, बच्चों ने सीखे योग के फायदे

बौंसी (बांका)/अंग भारत। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को बांका जिले के एम.के. पब्लिक स्कूल में योग और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिला। विद्यालय के निदेशक राजीव सिंह की अगुवाई में करीब 200 स्कूली बच्चों ने सामूहिक योगाभ्यास में हिस्सा लिया और स्वस्थ जीवनशैली का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल बच्चों को शारीरिक रूप से फिट बनाना था, बल्कि उन्हें प्रकृति के साथ जुड़ने का महत्व भी समझाना था। इस पहल के माध्यम से स्कूल ने यह संदेश दिया कि एक अनुशासित छात्र जीवन के लिए योग और स्वच्छ वातावरण दोनों ही अपरिहार्य हैं।

योग से बढ़ती है एकाग्रता

आज की डिजिटल दुनिया में बच्चों का ध्यान भटकना एक आम समस्या बन गई है। एम.के. पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य निजात खान ने बताया कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। जब बच्चे नियमित योग करते हैं, तो उनकी मानसिक शक्ति में अद्भुत सुधार आता है।

  • एकाग्रता में सुधार: प्राणायाम के अभ्यास से विद्यार्थियों की याददाश्त और फोकस में स्पष्ट अंतर दिखता है।
  • तनाव मुक्ति: पढ़ाई के बढ़ते दबाव के बीच योग बच्चों को मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
  • अनुशासन का विकास: योग करने से जीवन में समयबद्धता और संयम की आदतें विकसित होती हैं।
  • भावनात्मक स्थिरता: योगाभ्यास बच्चों को चिड़चिड़ेपन से दूर रखकर उन्हें शांत रहने में मदद करता है।

सीखे विभिन्न प्रकार के योगासन

विद्यालय की पीटी शिक्षिका ब्यूटी कुमारी ने बच्चों को योग की बुनियादी बारीकियों से परिचित कराया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कई कठिन आसनों और श्वसन क्रियाओं को पूरे जोश के साथ सीखा। इसमें शामिल प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार रहीं:

योगासन/प्राणायाम मुख्य लाभ
सूर्य नमस्कार पूरे शरीर की फुर्ती और ऊर्जा में वृद्धि
अनुलोम-विलोम श्वसन तंत्र और मानसिक शांति
मंडूकासन पाचन तंत्र और पेट के अंगों के लिए लाभकारी
कपालभाति शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना

पर्यावरण का संरक्षण जरूरी

योग के साथ-साथ इस आयोजन में ‘वृक्षारोपण’ को जोड़कर एक सराहनीय मिसाल पेश की गई। बच्चों ने केवल योगासन ही नहीं किए, बल्कि स्कूल परिसर में पौधे रोपकर धरती को हरा-भरा रखने का प्रण भी लिया। शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग चाहिए, वैसे ही हमारी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना जरूरी है। यह व्यावहारिक शिक्षा बच्चों के संस्कारों में पर्यावरण प्रेम को गहराई से बिठाने का काम करती है।

स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत

योग दिवस का यह कार्यक्रम एक दिन की गतिविधि तक सीमित नहीं रहा। स्कूल प्रबंधन ने सभी बच्चों और अभिभावकों से यह आह्वान किया कि वे योग को अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बनाएं। विद्यालय का मानना है कि योग को अपनाने वाला बच्चा न केवल पढ़ाई में अव्वल रहता है, बल्कि वह भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक भी बनता है।

“योग कोई धर्म या कर्मकांड नहीं है, यह एक जीवन जीने की कला है जो हमें खुद से जोड़ती है।” – स्कूल प्रबंधन की ओर से दिया गया यह संदेश आज के दौर में हर घर की जरूरत है।

इस पूरे आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि विद्यालय स्तर पर बच्चों को सही दिशा दी जाए, तो वे न केवल अपनी सेहत के प्रति जागरूक होंगे, बल्कि आने वाले समय में एक स्वस्थ समाज का निर्माण भी करेंगे। एम.के. पब्लिक स्कूल की यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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