फुल्लीडुमर (बांका)/अंग भारत। फुल्लीडुमर प्रखंड के भीतिया बाजार के निवासी शुभम साकेत ने पहली ही कोशिश में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण कर 152वीं रैंक हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल बांका जिले के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए एक ठोस उदाहरण है जो संसाधनों की कमी या विपरीत परिस्थितियों में भी प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं। शुभम ने बिना किसी कोचिंग के जाल में फंसे, अपने स्वाध्याय और अनुशासन के दम पर यह सफलता अर्जित की है, जो आज के दौर के परीक्षार्थियों के लिए सबसे बड़ा सबक है।
सफलता की नींव
शुभम साकेत का शैक्षणिक बैकग्राउंड उनकी सफलता की कहानी का आधार रहा है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ स्कूल, बांका से शुरू की, जिसने उनके बुनियादी ज्ञान को मजबूत किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली (रांची) का रुख किया, जो अपनी अकादमिक गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह कॉलेज से भूगोल (Geography) में स्नातक करने के दौरान उन्होंने विषयों की गहरी समझ विकसित की। यह शैक्षणिक यात्रा बताती है कि एक मजबूत आधार तैयार करना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कितना जरूरी है।
माता-पिता का मार्गदर्शन
शुभम के पिता राजाराम साह एक समाजसेवी हैं और उनकी माता सुनीता कुमारी शिक्षिका हैं। एक शिक्षित और संवेदनशील माहौल में पलने के कारण शुभम को घर से हमेशा सकारात्मक प्रेरणा मिली। एक शिक्षिका की संतान होने के नाते उन्हें अनुशासन का महत्व बचपन से ही पता था। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के अटूट विश्वास और शिक्षकों के सही मार्गदर्शन को दिया है। जब घर का वातावरण पढ़ाई के प्रति गंभीर हो, तो सफलता की राह काफी आसान हो जाती है, और शुभम का मामला इसका जीता-जागता प्रमाण है।
यूपीएससी और बीपीएससी
शुभम का मुख्य लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा थी। वे दिल्ली में रहकर अपनी तैयारी को धार दे रहे थे। बीपीएससी के बारे में शुभम का मानना है कि यदि आप सिविल सेवा के व्यापक पाठ्यक्रम (Syllabus) को सही ढंग से कवर करते हैं, तो राज्य स्तर की परीक्षाएं स्वाभाविक रूप से सरल हो जाती हैं। उन्होंने अपनी रणनीति में कुछ बिंदुओं को प्रमुखता दी:
- विषयों पर पकड़: भूगोल जैसे वैकल्पिक विषयों में अपनी पकड़ को मजबूत रखा।
- निरंतरता: बिना ब्रेक लिए रोजाना घंटों पढ़ाई करने की आदत डाली।
- रणनीतिक अध्ययन: फालतू की किताबों के बजाय चुनिंदा और मानक पुस्तकों पर भरोसा किया।
- समय का प्रबंधन: यूपीएससी के सिलेबस के साथ बीपीएससी के स्टेट-स्पेसिफिक जीके को समाहित किया।
युवाओं के लिए संदेश
शुभम की सफलता ने पूरे फुल्लीडुमर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। अब वे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं। उनकी सफलता से यह स्पष्ट होता है कि छोटे कस्बे या गांव से निकलकर भी देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में परचम लहराया जा सकता है। शुभम ने उन सभी छात्रों को संदेश दिया है जो अक्सर सोचते हैं कि दिल्ली या बड़े शहरों की महंगी कोचिंग के बिना सफलता संभव नहीं है। उनका जीवन इस बात को सिद्ध करता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में जिद्द हो, तो पहली कोशिश में भी प्रशासनिक सेवा का रास्ता साफ हो सकता है।
भावी प्रशासनिक भूमिका
152वीं रैंक हासिल करने के बाद, अब शुभम साकेत से एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करने की उम्मीदें हैं। उनकी शिक्षा और सामाजिक मूल्यों के संस्कार निश्चित रूप से उन्हें एक जन-समर्थक (Public-friendly) अधिकारी बनाएंगे। बांका जिले के लोगों में इस बात को लेकर खुशी है कि उनके बीच का एक होनहार बेटा अब राज्य की नीतियों को लागू करने वाली मशीनरी का हिस्सा बनेगा। शुभम की यह जीत सिर्फ एक रैंक नहीं, बल्कि मेहनत का एक ऐसा दस्तावेज है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
“सफलता रातों-रात नहीं मिलती, यह आपकी हर दिन की छोटी-छोटी आदतों और संकल्पों का सामूहिक परिणाम है।” – शुभम साकेत के अनुभव का निचोड़।








