भागलपुर, अंग भारत। विक्रमशिला सेतु पर हुए दुखद हादसे में विनय कुमार पासवान की असामयिक मृत्यु ने न केवल एक परिवार को उजड़ दिया है, बल्कि प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल दी है। मृतक के बेटे, लक्की कुमार ने बरारी थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए पुल निर्माण निगम और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इस घटना ने साबित कर दिया है कि बुनियादी ढांचे के रखरखाव में थोड़ी सी भी ढिलाई सीधे तौर पर लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। परिवार अब मुआवजे से ऊपर उठकर दोषियों के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है ताकि भविष्य में किसी और को यह दर्द न झेलना पड़े।
लापरवाही का दंश
विक्रमशिला सेतु भागलपुर की जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन इसकी बदहाली और सुरक्षा मानकों की अनदेखी आए दिन हादसों को न्योता देती है। लक्की कुमार का कहना है कि उनके पिता की जान निगम की लापरवाही के कारण गई है। सड़क की स्थिति हो या पुल पर सुरक्षा के इंतजाम, सब कुछ सवालों के घेरे में है।
- सुरक्षा गार्डों की अनुपस्थिति और उचित बैरिकेडिंग का अभाव।
- सड़क मरम्मत में घटिया सामग्री और सुस्ती।
- प्रशासन द्वारा समय पर शिकायतों का संज्ञान न लेना।
मुआवजे की हकीकत
लक्की कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार द्वारा घोषित चार लाख रुपये का मुआवजा उनके परिवार के भविष्य के लिए नाकाफी है। एक कमाने वाले व्यक्ति के बिना घर चलाना कैसे संभव होगा? उनके परिवार में अब मां और एक बहन की जिम्मेदारी लक्की के कंधों पर है।
महज कुछ रुपयों के चेक से पिता की कमी पूरी नहीं हो सकती। हम भीख नहीं, बल्कि न्याय चाहते हैं ताकि प्रशासन की जवाबदेही तय हो सके।
यह दर्द केवल लक्की का नहीं है, बल्कि उन तमाम परिवारों का है जो सरकारी व्यवस्था की मार झेलते हैं। केवल मुआवजा देना जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है, असली न्याय तब होगा जब सिस्टम सुधरेगा।
व्यवस्था की विफलता
समाजसेवी एवं मुखिया अजय कुमार उर्फ लाली मुखिया ने इस मामले को एक बड़ी प्रशासनिक विफलता करार दिया है। उनका तर्क है कि अगर समय रहते पुल की मरम्मत और सुरक्षा मानकों की जांच की गई होती, तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी।
| मुद्दा | प्रशासन का पक्ष | स्थानीय मांग |
|---|---|---|
| रखरखाव | दोषारोपण | तत्काल मरम्मत |
| सुरक्षा | सीमित संसाधन | सख्त ऑडिट |
अगली रणनीति
मुखिया अजय कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक शीर्ष अधिकारियों पर आंच नहीं आएगी, तब तक पुल निगम की कार्यशैली में बदलाव आना मुश्किल है।
सुधार की जरूरत
विक्रमशिला सेतु केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों का भरोसा है। हादसे के बाद से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है। प्रशासन को अब अपनी ‘फाइल क्लोज’ करने वाली मानसिकता से बाहर निकलना होगा। जनता की सुरक्षा केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या वे दोषियों को बचाएंगे या फिर पीड़ित को न्याय दिलाएंगे।








