नई दिल्ली,अंग भारत। वेनेजुएला में हाल ही में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ (Operation Amistad) की शुरुआत करते हुए मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। भारतीय वायुसेना के दो विमान शुक्रवार को चिकित्सा उपकरणों, राहत सामग्री और आपदा विशेषज्ञों की टीम के साथ वेनेजुएला के लिए रवाना हुए। यह कदम न केवल एक पड़ोसी मित्र की तरह भारत की वैश्विक जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि संकट की घड़ी में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का एक बड़ा उदाहरण भी पेश करता है। भारत का यह प्रयास भूकंप से जूझ रहे वेनेजुएला के लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
भूकंप से भारी तबाही
काराकास और उसके आसपास के क्षेत्रों में आए 7.5 और 7.2 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। ये झटके इतने भीषण थे कि कई बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। शुरुआती सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 200 के पार पहुंच गई है और घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हजारों परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बुनियादी ढांचा जैसे बिजली, पानी और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
राहत सामग्री का विवरण
भारत की तरफ से भेजी गई सहायता पूरी तरह से जरूरत आधारित है। इस मिशन में भेजी गई सामग्री की सूची निम्नलिखित है:
- 35 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री, जिसमें सूखे राशन, कंबल और टेंट शामिल हैं।
- एक पूर्णतः क्रियाशील अत्याधुनिक फील्ड हॉस्पिटल यूनिट, जो कठिन परिस्थितियों में सर्जरी तक करने में सक्षम है।
- दो ‘भीष्म क्यूब्स’ (BHISHM Cubes), जो आपदा के समय मौके पर ही चिकित्सा उपचार देने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं।
- जीवन रक्षक दवाएं और पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें।
विदेश मंत्री का बयान
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ का मुख्य उद्देश्य घायलों को तत्काल चिकित्सा प्रदान करना और मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए आवश्यक संसाधनों को जुटाना है। भारत की यह प्रतिबद्धता वैश्विक मंच पर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की नीति को पुनः सिद्ध करती है।
भीष्म क्यूब की भूमिका
भारत द्वारा भेजे गए ‘भीष्म क्यूब’ इस राहत मिशन का सबसे खास हिस्सा हैं। ये क्यूब्स ‘प्रोजेक्ट भीष्म’ के तहत तैयार किए गए हैं, जो पोर्टेबल अस्पताल के रूप में काम करते हैं। इनमें वे सभी उपकरण होते हैं जो एक सामान्य अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मिलते हैं। भूकंप जैसे आपदाओं में जहां अस्पताल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, वहां ये क्यूब्स कुछ ही घंटों में ऑपरेशन थिएटर और प्राथमिक उपचार केंद्र में तब्दील किए जा सकते हैं।
बचाव अभियान की गति
स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ मिलकर भारत की सहायता टीम भी जल्द ही जमीनी स्तर पर राहत कार्यों में जुट जाएगी। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में समय बहुत कीमती है। भारत द्वारा भेजे गए अत्याधुनिक उपकरणों से बचाव कार्यों को न केवल गति मिलेगी, बल्कि लोगों की जान बचाने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाएगी। फिलहाल, प्राथमिकता उन क्षेत्रों तक पहुंचना है जो भूस्खलन और टूटी सड़कों के कारण कट चुके हैं।
भारत का वैश्विक दायित्व
भारत अक्सर अंतरराष्ट्रीय आपदाओं के दौरान ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (First Responder) के रूप में सामने आया है। चाहे तुर्की में आया भूकंप हो या अन्य वैश्विक संकट, भारत ने हमेशा अपने सीमित संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए मदद की है। वेनेजुएला के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों के लिए यह कदम एक मील का पत्थर है। यह दर्शाता है कि भूगोल की दूरियां भारत की मानवीय संवेदनाओं के आगे कोई मायने नहीं रखतीं।
“संकट की घड़ी में भारत केवल एक देश के तौर पर नहीं, बल्कि एक मानवीय शक्ति के रूप में वेनेजुएला की जनता की पीड़ा को साझा कर रहा है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द राहत सामग्री उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।” – आधिकारिक सूत्र।
आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स काम कर रही है। भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो आगे और भी खेपें भेजी जाएंगी। यह ऑपरेशन न केवल वेनेजुएला के जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक भाईचारे का एक जीता-जागता प्रमाण भी है।








