भागलपुर, अंग भारत। भागलपुर के श्री श्री गौशाला सभागार में दधीचि देहदान समिति, बिहार की भागलपुर शाखा का औपचारिक गठन संपन्न हुआ। इस आयोजन का मूल उद्देश्य समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर नेत्रदान, अंगदान और देहदान जैसे पुनीत कार्यों के प्रति आमजन को जागरूक करना है। रविवार को आयोजित इस विशेष गोष्ठी में न केवल नई समिति का गठन किया गया, बल्कि शहर के गणमान्य नागरिकों ने एक मरणोपरांत महादान का संकल्प लेकर मानवता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
गठन और उद्देश्य
दधीचि देहदान समिति का नाम महर्षि दधीचि के पौराणिक त्याग से प्रेरित है, जिन्होंने लोक कल्याण के लिए अपनी अस्थियां दान कर दी थीं। भागलपुर में इस शाखा की स्थापना का मुख्य ध्येय उन लोगों तक पहुंचना है जो जरूरतमंदों को नई जिंदगी देना चाहते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत शांति मंत्र और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। डॉ. प्रमोद सिंघानिया ने अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि देहदान केवल एक दान नहीं, बल्कि विज्ञान और मानवता का मिलन है।
जागरूकता का संकल्प
- नेत्रदान के माध्यम से दृष्टिहीन लोगों को नई रोशनी प्रदान करना।
- अंगदान के जरिए अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की जान बचाना।
- मेडिकल छात्रों के शोध के लिए देहदान के महत्व को समझाना।
- भ्रांतियों को दूर कर सामाजिक मानसिक परिवर्तन लाना।
नयी टीम का गठन
कार्यक्रम के दौरान पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता और प्रदेश उपाध्यक्ष अरुण सत्यमूर्ति ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस टीम में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री और वित्त सचिव सहित कई ऊर्जावान कार्यकर्ता शामिल हैं। शपथ ग्रहण के दौरान सभी पदाधिकारियों ने यह प्रतिज्ञा ली कि वे बिना किसी स्वार्थ के, पूरे समर्पण के साथ भागलपुर के घर-घर में इस संदेश को पहुंचाएंगे। यह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है जिसे शहर की धड़कन बनाना इनका लक्ष्य है।
विधायक का सहयोग
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद भागलपुर के विधायक रोहित पाण्डेय ने इस पहल को क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग जानकारी के अभाव में अपना सर्वश्रेष्ठ दान करने से चूक जाते हैं। विधायक ने न केवल समिति के प्रयासों की सराहना की, बल्कि प्रशासनिक और व्यक्तिगत स्तर पर हर संभव मदद का भरोसा दिया। वहीं, गौशाला के महामंत्री गिरधारी केजरीवाल ने कहा कि गौशाला जैसे पवित्र स्थान पर इस समिति का जन्म लेना एक शुभ संकेत है, जो आने वाले समय में समाज को नई दिशा देगा।
कार्यशैली और विस्तार
बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री निर्मल कुमार जैन ने समिति की भावी योजनाओं का खाका खींचा। उन्होंने बताया कि अब भागलपुर में नियमित रूप से शिविर और विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी।
देहम देहदानं, परोपकाराय धर्मम्। शरीर के जाने के बाद भी यदि किसी की सांसें हमारे अंगों से चलती हैं, तो इससे बड़ा धर्म दूसरा कोई नहीं हो सकता।
समिति की रणनीति में अब स्कूल, कॉलेज और आवासीय सोसायटियों को जोड़ना शामिल है ताकि युवा पीढ़ी को भी इस महादान के बारे में शिक्षित किया जा सके।
नागरिकों की भागीदारी
इस आयोजन में शहर के हर वर्ग के लोगों ने शिरकत की। चिकित्सकों से लेकर उद्योगपतियों और शिक्षाविदों तक, हर कोई इस अभियान से जुड़ने के लिए उत्सुक दिखा। कार्यक्रम को सफल बनाने में मालू जैन, चांद झुनझुनवाला और चिंटू अग्रवाल जैसे समर्पित सदस्यों ने कड़ी मेहनत की। अंत में, उपस्थित सभी लोगों ने एक सामूहिक संकल्प लिया कि वे न केवल खुद देहदान का फॉर्म भरेंगे, बल्कि अपने आसपास के पांच अन्य परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। यह छोटा सा प्रयास भविष्य में भागलपुर को अंगदान के क्षेत्र में एक अग्रणी शहर के रूप में स्थापित कर सकता है।







