नई दिल्ली,अंग भारत। कांग्रेस ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी योजना यानी वीबी-जी राम जी योजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने दावा किया है कि कई राज्यों ने इस नई योजना को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। कांग्रेस के अनुसार, भाजपा शासित मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने योजना से राज्यों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को लेकर चिंता जाहिर की है।
राज्यों पर बढ़ते आर्थिक दबाव का उठाया मुद्दा
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से कहा कि कई राज्य सरकारें नई व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव से पहले राज्यों, संसदीय स्थायी समिति और अन्य हितधारकों से पर्याप्त चर्चा नहीं की।जयराम रमेश ने कहा कि नई योजना के तहत राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ सकती है, जिससे उनके बजट पर अतिरिक्त दबाव आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजना में बदलाव करते समय राज्यों की सहमति और व्यापक विचार-विमर्श जरूरी था।
मजदूरी बढ़ाने और ब्लैकआउट अवधि पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई राज्यों ने ग्रामीण श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए मजदूरी में सुधार आवश्यक है।इसके अलावा कुछ राज्यों ने खेती के व्यस्त मौसम के दौरान प्रस्तावित ब्लैकआउट अवधि को लेकर भी आपत्ति जताई है। इस अवधि में रोजगार उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीण मजदूरों और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मनरेगा खत्म करने के फैसले पर कांग्रेस का विरोध
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राजनीतिक कारणों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी देती थी, जबकि नई योजना से रोजगार सुरक्षा और राज्यों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव से पहले संसद में विस्तृत समीक्षा और राज्यों के साथ सहमति बनाना जरूरी था।










