नई दिल्ली,अंग भारत। पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न पी.वी. नरसिम्हा राव की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत देश के कई शीर्ष नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। नरसिम्हा राव का नाम आधुनिक भारत के इतिहास में एक ऐसे युगपुरुष के रूप में दर्ज है, जिन्होंने न केवल देश को एक गंभीर आर्थिक संकट से बाहर निकाला, बल्कि विदेश नीति और कूटनीति के नए अध्याय भी लिखे। आज जब हम उनके योगदान का विश्लेषण करते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि 1991 के चुनौतीपूर्ण दौर में उनके द्वारा लिए गए कठोर निर्णयों ने ही आज के वैश्विक भारत की नींव रखी थी।
एक युग का परिवर्तन
पी.वी. नरसिम्हा राव को अक्सर “भारत के आर्थिक सुधारों का जनक” कहा जाता है। 1991 में जब भारत विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और भारी आर्थिक मंदी से जूझ रहा था, तब राव ने डॉ. मनमोहन सिंह के साथ मिलकर ‘लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन’ (LPG) की शुरुआत की। इस कदम ने दशकों पुराने ‘लाइसेंस राज’ की बेड़ियों को तोड़ दिया और भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया।
- लाइसेंस राज का अंत कर निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना।
- रुपये का अवमूल्यन कर निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाना।
- विदेशी निवेश के लिए नियमों को सरल और पारदर्शी बनाना।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की दक्षता पर ध्यान केंद्रित करना।
ओम बिरला की श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्हें नमन करते हुए याद दिलाया कि राव केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक महान नीति निर्माता थे। बिरला के अनुसार, प्रशासन के प्रति उनकी समझ इतनी गहरी थी कि उन्होंने जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान भी शांति और विवेक से निकाला। उनकी प्रशासनिक दक्षता और निर्णय लेने की क्षमता आज के युवा नेताओं के लिए एक केस स्टडी की तरह है।
पीएम मोदी का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें न केवल एक कुशल प्रशासक, बल्कि एक विद्वान नेता के रूप में याद किया। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि राव की भारतीय संस्कृति और परंपराओं की समझ उन्हें अन्य समकालीन नेताओं से अलग बनाती थी। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था, जो राजनीति के साथ-साथ साहित्य, भाषा और कूटनीति का अद्भुत संगम था।
कूटनीति और लुक ईस्ट
राजनाथ सिंह और मल्लिकार्जुन खरगे दोनों ने राव की विदेश नीति की सराहना की। राव ने ‘लुक ईस्ट’ नीति की नींव रखी, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। यह रणनीति आज भी भारत की विदेश नीति का एक मुख्य स्तंभ बनी हुई है।
परमाणु कार्यक्रम में भूमिका
बहुत कम लोग जानते हैं कि पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में भारत के परमाणु कार्यक्रम ने एक निर्णायक दिशा पकड़ी थी। उन्होंने सुरक्षा और सामरिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देते हुए देश को परमाणु शक्ति के रूप में विकसित करने की दिशा में गुप्त लेकिन प्रभावी कदम उठाए। खरगे ने उनके कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि इन्हीं नीतियों ने भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया।
तेलंगाना का गौरव
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने उन्हें तेलंगाना का गौरव बताते हुए कहा कि एक विद्वान और दूरदर्शी नेता के रूप में उनका जीवन करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राव ने जमीनी स्तर से राजनीति शुरू की थी और प्रधानमंत्री पद तक पहुँचने के बाद भी उनकी सादगी और विनम्रता बनी रही।
बदलते भारत की नींव
| क्षेत्र | राव का मुख्य योगदान |
|---|---|
| अर्थव्यवस्था | 1991 के आर्थिक सुधार और एलपीजी मॉडल। |
| विदेश नीति | लुक ईस्ट नीति और एशियाई देशों से प्रगाढ़ संबंध। |
| रक्षा | भारत के परमाणु कार्यक्रम को रणनीतिक मजबूती। |
| प्रशासन | राजनीतिक अस्थिरता के दौर में भी विकास को प्राथमिकता। |
निष्कर्षतः, पी.वी. नरसिम्हा राव का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन समय में ही नेतृत्व की असली परीक्षा होती है। जब देश पतन की ओर था, तब उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से भारत की दिशा बदल दी। आज उनकी जयंती पर उन्हें याद करना सिर्फ रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि उस दूरदर्शिता को नमन करना है जिसने भारत को आज की वैश्विक महाशक्ति बनने की राह दिखाई है। उनका योगदान न केवल आर्थिक सुधारों तक सीमित रहा, बल्कि उन्होंने भारत के वैश्विक कद को भी नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।








