नई दिल्ली,अंग भारत। भारतीय सेना को एक नया नेतृत्व मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने 31वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में कमान संभाल ली है। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने स्वदेशीकरण और तकनीक-संचालित युद्ध कौशल को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है। साउथ ब्लॉक लॉन्स में गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करने के बाद, उन्होंने अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के.एम. सेठ और भाई रियर एडमिरल रविनीश सेठ का सम्मान कर एक पुरानी सैन्य परंपरा को जीवंत किया। उनका स्पष्ट संदेश है कि भारतीय सेना अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को पूरा करने वाली एक आत्मनिर्भर और तकनीक-आधारित आधुनिक फोर्स बनेगी।
नई लीडरशिप का विजन
जनरल धीरज सेठ का दृष्टिकोण स्पष्ट है: आने वाले समय के युद्ध केवल बंदूक और बारूद से नहीं, बल्कि एआई, ड्रोन और साइबर क्षमताओं से लड़े जाएंगे। उन्होंने अपने पहले संबोधन में कहा कि भारतीय सेना सीमाओं पर सतर्क तो रहेगी ही, साथ ही भविष्य की उन चुनौतियों के लिए खुद को ढाल लेगी जिनका अभी हमने सामना नहीं किया है।
- तकनीकी आधुनिकीकरण: ऑपरेशंस को मल्टी-डोमेन क्षमता से लैस करना।
- इनोवेशन पर जोर: हर स्तर पर नवाचार को सैन्य रणनीति का हिस्सा बनाना।
- स्वदेशी तकनीक: विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम कर भारतीय रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना।
अनोखी सैन्य विरासत
जनरल सेठ का जीवन सैन्य अनुशासन की मिसाल है। एनडीए, खड़कवासला के पूर्व छात्र रहे जनरल धीरज सेठ आर्मर्ड कोर से आने वाले 1997 के बाद के पहले प्रमुख हैं। यह पद उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक विरासत को आगे बढ़ाने जैसा है। उन्होंने उस 21 स्ट्राइक कोर की भी कमान संभाली है, जिसके प्रमुख कभी उनके पिता रह चुके थे। यह एक ऐसा दुर्लभ संयोग है जो सेना के प्रति उनके पारिवारिक समर्पण को दर्शाता है।
ड्यूटी और राष्ट्रवाद
‘ड्यूटी, ऑनर और नेशन फर्स्ट’ का मंत्र उनके कामकाज की धुरी रहेगा। जनरल सेठ का मानना है कि सेना की असली ताकत उसके जवान हैं, फिर चाहे वह हाल ही में भर्ती हुआ अग्निवीर हो या फिर वर्षों का अनुभव रखने वाला पूर्व सैनिक। उन्होंने सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि उनका बलिदान ही भारतीय सेना के डीएनए में वीरता का संचार करता है।
संयुक्त सैन्य क्षमता
भविष्य के युद्धों में किसी एक सेना के भरोसे जीत हासिल करना कठिन है। इसे समझते हुए नए सेना प्रमुख ने भारतीय वायु सेना और नौसेना के साथ तालमेल बिठाने पर विशेष जोर दिया है।
| लक्ष्य | रणनीति |
|---|---|
| ऑपरेशनल तालमेल | तीनों सेनाओं के बीच डेटा शेयरिंग और संयुक्त अभ्यास |
| आत्मनिर्भरता | मेक इन इंडिया रक्षा हथियारों का अधिकतम उपयोग |
| भविष्य की तैयारी | एआई और रोबोटिक सैन्य हार्डवेयर को प्राथमिकता |
क्यों यह बदलाव अहम है
मौजूदा दौर में जब भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, जनरल धीरज सेठ का नेतृत्व सेना को एक नई दिशा देगा। उनका फोकस रक्षा बजट का सही उपयोग और स्वदेशी तकनीकों को युद्धक्षेत्र में उतारने पर है। वे जानते हैं कि सेना तभी अजेय है जब उसके पास अपने संसाधन हों। जनरल सेठ की कार्यशैली और उनका सैन्य बैकग्राउंड यह विश्वास दिलाता है कि भारतीय सेना अब आने वाले दशकों के खतरों से निपटने के लिए कहीं अधिक आक्रामक और तकनीकी रूप से सक्षम होगी।
अंत में, जनरल धीरज सेठ का आगमन भारतीय रक्षा जगत में एक नई ऊर्जा लेकर आया है। जहां एक ओर वे पुरानी परंपराओं को संजोकर चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे बदलाव की उस बयार को भी स्वीकार कर रहे हैं, जो भारतीय सेना को विश्व की सबसे आधुनिक सेनाओं की कतार में लाकर खड़ा कर देगी।








