मुजफ्फराबाद, अंग भारत। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की फिजाओं में इन दिनों भारी तनाव का मंजर है, जहां जेएएसी प्रमुख शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी ने पूरे क्षेत्र में सुलगते गुस्से को और भड़का दिया है। मीर के साथ 600 से अधिक समर्थकों को हिरासत में लेने की कार्रवाई ने पाकिस्तान की संघीय सरकार के खिलाफ स्थानीय जनता की नाराजगी को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है, जिससे वहां की प्रशासनिक व्यवस्था हिल गई है। यह गिरफ्तारी केवल एक कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि दशकों पुराने राजनीतिक असंतोष का हिंसक परिणाम है जो अब नियंत्रण से बाहर होता दिख रहा है।
गिरफ्तारी और बढ़ता आक्रोश
हाल ही में धीरकोट के संगर फत्तारे इलाके में पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान शौकत नवाज मीर को उनके दो करीबी सहयोगियों के साथ दबोच लिया। मीर जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) का नेतृत्व करते हैं, जो लंबे समय से स्थानीय अधिकारों की आवाज उठा रही है। पुलिस ने न केवल मीर को पकड़ा, बल्कि संगठन के 600 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को भी सलाखों के पीछे डाल दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने पीओके के नागरिकों के बीच डर के बजाय विरोध की आग को और तेज कर दिया है, जिससे रावलकोट से लेकर मुजफ्फराबाद तक विरोध प्रदर्शनों का दौर चल पड़ा है।
रावलकोट में जनसैलाब
द बलोचिस्तान पोस्ट और द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट्स के मुताबिक, रावलकोट का ईदगाह मैदान मंगलवार को इतिहास का गवाह बना। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। भीड़ की मुख्य मांग यही थी कि पीओके पाकिस्तान का अभिन्न हिस्सा नहीं है, जो वहां के प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने मीर पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे इस आंदोलन को पूरी तरह कुचलने के लिए किस हद तक जा सकते हैं।
हिंसा और गंभीर आरोप
- मुजफ्फराबाद के उपायुक्त मुनीर कुरैशी ने शौकत नवाज मीर पर देशद्रोह के गंभीर आरोप लगाए हैं।
- प्रशासन के अनुसार, हालिया प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम सात लोगों (चार सुरक्षाकर्मी और तीन नागरिक) की जान गई थी।
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रियाज मुगल ने स्पष्ट किया कि मीर कई मामलों में पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शामिल थे।
- सरकार ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसे समर्थक राजनीतिक बदले की कार्रवाई मानते हैं।
आरक्षित सीटों का विवाद
पूरे बवाल की जड़ में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है—विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें। जेएएसी की दलील है कि भारत के जम्मू-कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित इन सीटों को अब समाप्त कर देना चाहिए। हालांकि, पीओके का उच्चतम न्यायालय इन सीटों को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान कर चुका है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, यह मुद्दा जनता और सरकार के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर रहा है। लोगों का मानना है कि यह आरक्षित सीटें स्थानीय अधिकारों का हनन हैं, जबकि सरकार इसे अपनी सत्ता का आधार मानती है।
इनाम और सरकारी नीति
पाकिस्तान सरकार की रणनीति अब ‘इनाम और दमन’ की हो गई है। शौकत नवाज मीर के अलावा, सरकार ने उमर नजीर कश्मीरी, ख्वाजा मेहरान अरशद और सरदार अमन खान जैसे नेताओं पर भी एक-एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर दिया है।
| नेता का नाम | इनाम राशि | आरोप |
|---|---|---|
| शौकत नवाज मीर | 1 करोड़ रुपये | देशद्रोह, हिंसा भड़काना |
| उमर नजीर कश्मीरी | 1 करोड़ रुपये | शांति भंग, नफरत फैलाना |
| ख्वाजा मेहरान अरशद | 1 करोड़ रुपये | सरकारी कार्य में बाधा |
स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह इनाम राशि नहीं, बल्कि उन लोगों को चुप कराने की कीमत है जो हक की बात करते हैं। जिस तरह से रातों-रात बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गई हैं, वह बताती हैं कि आने वाले दिन पीओके की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरे होने वाले हैं। जनता अब केवल विरोध तक सीमित नहीं है, वे अपनी पहचान और अस्तित्व के लिए सरकार से टकराने को तैयार बैठे हैं।







