जयराम रमेश का आरोप—सरकार चर्चा से बच रही, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ रहे सवाल; कई बड़े मुद्दों को सदन में उठाने की तैयारी
नई दिल्ली,अंग भारत। संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस सत्र में विदेश नीति, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, परिसीमन, एक राष्ट्र-एक चुनाव और अयोध्या राम मंदिर में कथित दान अनियमितताओं जैसे कई अहम मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाएगी। पार्टी का कहना है कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन सरकार चर्चा से बचने की कोशिश कर रही है।कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश ने शनिवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पार्टी संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। उनके मुताबिक, विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर खुली चर्चा हो, लेकिन सरकार संसद को केवल औपचारिकता की तरह चला रही है।
चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर उठे सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई राजनीतिक दलों ने चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो सकता है।उन्होंने यह भी बताया कि 24 राजनीतिक दलों और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। कांग्रेस नेता ने उम्मीद जताई कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट उचित हस्तक्षेप करेगा और स्थिति स्पष्ट होगी।
परिसीमन और एक राष्ट्र-एक चुनाव पर तीखी प्रतिक्रिया
लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसके पीछे भाजपा की राजनीतिक मंशा छिपी हुई है। उनका कहना था कि भाजपा का उद्देश्य दो-तिहाई बहुमत हासिल कर संविधान में बदलाव करना है।उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने के बाद भाजपा अब राजनीतिक प्रतिशोध की दिशा में काम कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सामाजिक न्याय और आरक्षण जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
संसद की सर्वदलीय बैठक को बताया औपचारिकता
जयराम रमेश ने कहा कि मानसून सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उनके अनुसार, विपक्ष की बात तो सुनी जाती है, लेकिन असल में एजेंडा प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय तय करते हैं।उन्होंने यह भी आशंका जताई कि सरकार इस सत्र में एक राष्ट्र-एक चुनाव और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव फिर से ला सकती है, जिस पर विपक्ष अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराएगा।
राम मंदिर दान और धार्मिक संस्थानों पर आरोप
अयोध्या राम मंदिर में दान को लेकर कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए जयराम रमेश ने कहा कि भगवान राम के नाम पर लोगों से भारी मात्रा में चंदा लिया गया, लेकिन अब उसके दुरुपयोग के आरोप सामने आ रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि इसी तरह के मामले केदारनाथ और बदरीनाथ से भी जुड़े हैं और इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
विदेश नीति पर भी सरकार को घेरने की तैयारी
कांग्रेस नेता ने विदेश नीति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि हालांकि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सुरक्षा बलों ने सफलता हासिल की, लेकिन कूटनीतिक मोर्चे पर देश को झटका लगा है।उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के बीच बढ़ती नजदीकी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से महत्व मिल रहा है।इसके साथ ही उन्होंने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि सरकार पिछले कई वर्षों से विदेश नीति और चीन से जुड़े अहम मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा से बचती रही है।
मानसून सत्र में गरमाएंगे कई राजनीतिक मुद्दे
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि मानसून सत्र में वह सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की रणनीति के साथ उतरेगी। चुनाव आयोग से लेकर विदेश नीति और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मुद्दों तक, विपक्ष का फोकस संसद में व्यापक बहस कराने पर रहेगा। अब देखना यह होगा कि आने वाले सत्र में इन मुद्दों पर कितना राजनीतिक टकराव देखने को मिलता है।










