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थोक महंगाई में फिर बढ़ोतरी, जून में बढ़कर 9.87 फीसदी पर पहुंची दर

भारत में थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी के बाद बाजार में सब्जियों और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ती हुई और परेशान आम आदमी

नई दिल्ली,अंग भारत। देश में महंगाई को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है। खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून महीने में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.87 फीसदी पहुंच गई है। इससे पहले मई में यह दर 9.68 फीसदी थी।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक महंगाई दर पर पड़ा है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का असर

मंत्रालय के अनुसार, जून महीने में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर बढ़कर 5.49 फीसदी हो गई। मई में यह आंकड़ा 3.60 फीसदी था।खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई के आंकड़ों पर दिखाई दिया है। बाजार में कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर भी इसका असर पड़ रहा है।

ईंधन और बिजली की महंगाई में आई कमी

हालांकि ईंधन और बिजली की श्रेणी में थोक महंगाई दर में थोड़ी राहत देखने को मिली है। जून में यह दर 27.41 फीसदी रही, जबकि मई में यह 30.33 फीसदीथी।मंत्रालय ने बताया कि खनिज तेल, जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद भी शामिल हैं, का असर थोक महंगाई के आंकड़ों पर पड़ा है। इसके अलावा धातु, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में बदलाव का भी असर देखने को मिला।

गैर-खाद्य वस्तुओं और खनिजों के दाम बढ़े

जून में गैर-खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 11.07 फीसदी दर्ज की गई। वहीं खनिज श्रेणी में महंगाई दर 9.45 फीसदी रही।इन क्षेत्रों में कीमतों में बढ़ोतरी का असर उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिसका प्रभाव आगे चलकर बाजार में सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

विनिर्मित उत्पादों की महंगाई स्थिर रही

विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी में थोक महंगाई दर जून में मई के बराबर 7.48 फीसदी पर बनी रही।मंत्रालय ने बताया कि थोक मूल्य सूचकांक की गणना के लिए वर्तमान आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है। इस सूचकांक के जरिए देश में थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापा जाता है।

खुदरा महंगाई भी बढ़ी थी

इससे पहले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। जून महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 17 महीने के उच्च स्तर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई थी। मई में यह दर 3.93 फीसदी थी।खुदरा महंगाई का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है, क्योंकि इसमें रोजमर्रा की जरूरतों वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को शामिल किया जाता है।

आरबीआई ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान

महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान में भी बदलाव किया है। आरबीआई ने पिछले महीने महंगाई दर के अनुमान को 4.6 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया था।आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा पर खाद्य कीमतों, कच्चे तेल के दाम और वैश्विक बाजार की स्थिति का असर देखने को मिलेगा। सरकार और रिजर्व बैंक दोनों की नजर अब कीमतों के इस रुझान पर बनी हुई है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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