भागलपुर,अंग भारत। करीब चार हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रही मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। निर्माण पूरा होने से पहले ही सड़क में दरार आने का मामला सामने आया है। भागलपुर जिले के गनगनिया के पास निर्माणाधीन फोरलेन की डाउन लाइन में करीब 40 मीटर लंबी और लगभग दो इंच चौड़ी दरार देखी गई है।इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और तकनीकी मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पहले भी सामने आ चुकी है सड़क धंसने की समस्या
मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन परियोजना में यह पहली बार नहीं है, जब निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले जुलाई 2024 में पहली बारिश के दौरान सड़क के एक हिस्से में धंसाव की समस्या सामने आई थी।उस समय कहलगांव के दियोरी बंशीपुर-चांय टोला के पास कोवा नदी के नजदीक सड़क के ढलाई वाले हिस्से में तीन जगहों पर धंसाव हुआ था। सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने तत्काल उस हिस्से की घेराबंदी कर मरम्मत का काम शुरू कराया था।
‘चूहों से मिट्टी खोदने’ की बताई गई थी वजह
2024 में सड़क धंसने के मामले में निर्माण एजेंसी और अधिकारियों की ओर से दावा किया गया था कि फ्लाई ऐश वाले हिस्से की मिट्टी को चूहों ने खोद दिया, जिसके कारण सड़क में धंसाव हुआ।हालांकि मौके पर जांच करने पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों ने इस दावे पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सड़क के दोनों तरफ कई मीटर ऊंची मिट्टी की भराई होने के बावजूद सिर्फ चूहों की वजह से इतना बड़ा नुकसान होना संभव नहीं लगता।अधिकारियों ने उस समय मिट्टी की भराई में लापरवाही और फ्लाई ऐश के कटाव को संभावित कारण माना था।
अब गनगनिया में आई दरार से बढ़ी चिंता
दो साल बाद अब इसी परियोजना में गनगनिया के पास सड़क में लंबी दरार आने से फिर से निर्माण गुणवत्ता पर चर्चा शुरू हो गई है।जानकारी के मुताबिक, फोरलेन की डाउन लाइन में करीब 40 मीटर के हिस्से में दरार आई है। सड़क निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, ऐसे में इस तरह की समस्या सामने आने से परियोजना की मजबूती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एनएचएआई ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएचएआई ने जांच टीम गठित कर दी है। परियोजना निदेशक मनीष कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य अभी जारी है और शुरुआती जांच में सबग्रेड वर्क वाले हिस्से में दरार दिखाई दी है।उन्होंने कहा कि कई बार बिटुमिन के सेट होने की प्रक्रिया के दौरान भी ऐसी स्थिति बन सकती है। लेकिन अगर जांच में कोई बड़ी तकनीकी कमी सामने आती है तो केवल ऊपर से मरम्मत नहीं की जाएगी, बल्कि उस हिस्से को पूरी तरह तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों ने उठाए गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल
सड़क निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पहले हुई धंसाव की घटनाओं की अगर समय रहते गहन तकनीकी जांच कर स्थायी समाधान निकाला जाता, तो भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता था।उनका मानना है कि इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजना में मिट्टी की गुणवत्ता, भराई के तरीके और निर्माण सामग्री की लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है।
कई जिलों के लिए अहम है यह परियोजना
मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन बिहार की एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना मानी जा रही है। इसके पूरा होने से मुंगेर, भागलपुर और साहिबगंज क्षेत्र के बीच यातायात और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।यह सड़क क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी काफी अहम मानी जा रही है। लेकिन उद्घाटन से पहले ही सड़क में धंसाव और दरार जैसी समस्याएं सामने आने से परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।अब सभी की नजर एनएचएआई की जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि सड़क में दरार आने की असली वजह क्या है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।










