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500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनेगा कामाख्या कॉरिडोर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कार्य शुरू होने की दी जानकारी

असम के प्रसिद्ध मां कामाख्या मंदिर में कामाख्या कॉरिडोर परियोजना के निर्माण कार्य की शुरुआत की जानकारी देते मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और भव्य मंदिर का प्रस्तावित रूप।

गुवाहाटी। असम के नीलाचल पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से एक, मां कामाख्या मंदिर के कायाकल्प के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले ‘कामाख्या कॉरिडोर’ (Kamakhya Corridor) परियोजना का निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के जरिए इस ऐतिहासिक शुरुआत की घोषणा करते हुए साफ किया कि इस कॉरिडोर को उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस भव्य परियोजना का सीधा उद्देश्य मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भीड़-भाड़ से बचाना, उन्हें विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं देना और असम को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन के नक्शे पर सबसे ऊपर लाना है।

क्यों पड़ी कामाख्या कॉरिडोर की जरूरत? मौजूदा चुनौतियां और समाधान

हर साल जून के महीने में जब यहां प्रसिद्ध ‘अंबुबाची मेला’ लगता है, तो देश-विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या अचानक से बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में भी रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है। संकरे पहाड़ी रास्ते और सीमित जगह होने के कारण बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों को दर्शन करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार त्योहारों के समय भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

प्रस्तावित कामाख्या कॉरिडोर इसी समस्या का एक स्थाई और आधुनिक समाधान है। इस परियोजना के तहत मंदिर के मुख्य परिसर के आसपास की खुली जगह को लगभग तीन गुना तक बढ़ाया जाएगा। कॉरिडोर बनने से न केवल श्रद्धालुओं के चलने-फिरने की जगह चौड़ी होगी, बल्कि कतार प्रबंधन को भी इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि लोगों को तेज धूप और बारिश में घंटों खड़े न रहना पड़े।

“काशी और उज्जैन के बाद अब कामाख्या धाम का यह बदलाव पूर्वोत्तर भारत के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित होगा। यह केवल पत्थरों और कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि हमारी सदियों पुरानी आस्था को आधुनिकता के साथ सहेजने का एक बेहतरीन प्रयास है।” – गुवाहाटी के स्थानीय इतिहासकार और सांस्कृतिक विश्लेषक

कामाख्या कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएं और ढांचागत बदलाव

इस मेगा प्रोजेक्ट को कई चरणों में पूरा किया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि मंदिर के मूल ऐतिहासिक ढांचे और प्राकृतिक पहाड़ी सौंदर्य से बिना किसी छेड़छाड़ के, इसके आसपास की सुविधाओं को नया रूप दिया जा रहा है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम

  • विशाल प्रवेश द्वार और प्रदक्षिणा पथ: मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों को चौड़ा किया जाएगा और एक सुंदर प्रदक्षिणा मार्ग बनाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु आसानी से परिक्रमा कर सकें।
  • होल्डिंग एरिया (प्रतीक्षा कक्ष): लगभग 8,000 से 10,000 श्रद्धालुओं के बैठने की क्षमता वाला एक ढका हुआ वेटिंग हॉल बनेगा, जिसमें पीने का पानी, शौचालय और बैठने की आधुनिक व्यवस्था होगी।
  • आधुनिक वीआईपी और सामान्य पास सिस्टम: दर्शन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन कतारों को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जाएगा, जिससे दलालों और अव्यवस्था पर लगाम लगेगी।
  • दिव्यांगों के लिए विशेष इंतजाम: व्हीलचेयर ट्रैक, रैंप और लिफ्ट की व्यवस्था की जाएगी ताकि शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को भी मां के दर्शन में कोई बाधा न आए।

परियोजना से जुड़ी कुछ खास जानकारियां (एक नजर में)

इस बड़े प्रोजेक्ट के मुख्य पहलुओं और इसके स्वरूप को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें:

विशेषता/पहलू विवरण
कुल बजट 500 करोड़ रुपये से अधिक
प्रेरणा स्रोत काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (वाराणसी)
स्थान नीलाचल पहाड़ी, गुवाहाटी, असम
मुख्य उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, बुनियादी ढांचा सुधार और भव्यता देना
रोजगार क्षेत्र होटल, टूर गाइड, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प

असम की स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर इसका असर

जब भी किसी धार्मिक स्थल का इस स्तर पर विकास होता है, तो उसका सीधा असर वहां के आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। कामाख्या कॉरिडोर के बनने से गुवाहाटी और आसपास के इलाकों में टूरिज्म इंडस्ट्री को नए पंख लगेंगे। वर्तमान में अधिकांश पर्यटक कामाख्या मंदिर में दर्शन करने के बाद सीधे लौट जाते हैं। नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में ही लाइट एंड साउंड शो, सांस्कृतिक संग्रहालय और सुंदर बगीचे बनाए जाएंगे, जो पर्यटकों को रुकने के लिए आकर्षित करेंगे।

इससे स्थानीय होटल व्यवसाय, होमस्टे, टैक्सी ड्राइवर, टूर गाइड और प्रसाद-हस्तशिल्प बेचने वाले छोटे दुकानदारों की कमाई में भारी बढ़ोतरी होगी। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद गुवाहाटी आने वाले सैलानियों की संख्या दोगुनी हो सकती है, जिससे असम की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलेगी।

प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण भी है जरूरी

चूंकि कामाख्या मंदिर नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है, जो कि बेहद संवेदनशील और हरा-भरा क्षेत्र है, इसलिए पर्यावरण संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। असम सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कॉरिडोर के निर्माण में पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। पहाड़ों को अनावश्यक रूप से काटने के बजाय प्राकृतिक ढलान का ही इस्तेमाल किया जाएगा और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर नए पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे ताकि इस पवित्र स्थल की प्राकृतिक शांति बनी रहे।

कुल मिलाकर, 500 करोड़ रुपये का यह कामाख्या कॉरिडोर सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह असम की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने नए और भव्य ढंग से पेश करने की एक गंभीर पहल है। आने वाले समय में जब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह बनकर तैयार होगा, तब मां कामाख्या के भक्तों को एक नया, सुरक्षित और दिव्य अहसास मिलेगा जो भक्ति के साथ-साथ आधुनिक सुख-सुविधाओं का भी बेहतरीन संगम होगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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