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बिहार: सफाईकर्मियों और चालक दल की हड़ताल जारी, राजधानी पटना में कचरे का संकट गहराया

बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर फैला कूड़ा और कचरे का संकट दर्शाता चित्र, जहां सफाईकर्मियों की हड़ताल के बाद नगर निगम पुलिस सुरक्षा में कचरा उठा रहा है।

पटना,अंग भारत। बिहार के सभी नगर निकायों में कार्यरत लगभग 42 हजार सफाई कर्मचारियों और चालक दल की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही, जिसके कारण पटना, दरभंगा, बिहारशरीफ और समस्तीपुर जैसे प्रमुख शहरों में कचरा प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है। सफाईकर्मियों की इस सामूहिक हड़ताल की वजह से गली-मोहल्लों में गंदगी का अंबार लग गया है और सड़ते हुए कचरे की बदबू से आम जनता का जीना मुहाल हो चुका है। हालांकि प्रशासन पुलिस बल की मदद से रात के समय कचरा उठाने की वैकल्पिक कोशिशें कर रहा है, लेकिन हड़ताली कर्मी इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। इस संकट ने न केवल शहरों की सूरत बिगाड़ दी है, बल्कि मच्छरों के प्रकोप और बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ा दिया है।

हड़ताल की मुख्य वजहें

सफाईकर्मियों की यह हड़ताल कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी बुनियादी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार और नगर प्रशासन उनकी लगातार अनदेखी कर रहे हैं। पटना नगर निगम समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने हड़ताल पर जाने की लिखित सूचना लगभग डेढ़ महीने पहले ही प्रशासन को दे दी थी। उनका आरोप है कि यदि सरकार की नीयत साफ होती, तो इतने लंबे समय में बातचीत के जरिए कोई न कोई बीच का रास्ता आसानी से निकाला जा सकता था।

“हमने डेढ़ महीने पहले हड़ताल की सूचना दे दी थी। अगर सरकार की मंशा सही होती तो सूचना देने के एक सप्ताह के अंदर ही बातचीत कर समस्या का समाधान करने की कोशिश की जाती।” – चंद्र प्रकाश सिंह, अध्यक्ष, पटना नगर निगम समन्वय समिति

समस्तीपुर नगर निगम कर्मचारी संघ के संगठन सचिव राजकुमार राम ने इस आंदोलन के पीछे की वास्तविक पीड़ा को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि यह पूरी लड़ाई मुख्य रूप से तीन सूत्री मांगों को लेकर लड़ी जा रही है। उनके अनुसार, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पिछले 10-10 वर्षों से लगातार नगर निगमों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी नहीं किया गया। उन्हें बेहद कम वेतन मिलता है और वे सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं जो एक नियमित कर्मचारी को मिलनी चाहिए।

शहरों में बिगड़े हालात

इस हड़ताल का असर बिहार के छोटे-बड़े हर शहर में साफ तौर पर देखा जा सकता है। सड़कों के किनारे लगे कूड़े के ढेर अब मुख्य रास्तों तक फैल चुके हैं। नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि किस शहर में स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है:

शहर का नाम हड़ताली कर्मचारियों की संख्या दैनिक कचरा उत्पादन (लगभग) वर्तमान स्थिति
पटना 5,000+ 800-900 टन रात 10 से सुबह 4 बजे तक पुलिस की सुरक्षा में सीमित कचरा उठाव।
दरभंगा 1,500+ 10 टन प्रतिदिन तीन दिनों से कचरा उठाव पूरी तरह ठप, कार्यालय में तालाबंदी।
बिहारशरीफ 1,300+ 250 टन प्रतिदिन मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन जारी, सड़कों पर कचरे का भारी ढेर।
समस्तीपुर 1,000+ पूर्ण कार्य बहिष्कार, तीन सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन।
सुपौल सड़कों पर कचरा जमा, नगर परिषद की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं।

पटना का संकट

राजधानी पटना में स्थिति सबसे नाजुक है क्योंकि यहां लगभग 5,000 सफाईकर्मी हड़ताल पर अड़े हुए हैं। नगर निगम ने शहर के मुख्य इलाकों से कचरा हटाने के लिए प्राइवेट और आउटसोर्स कर्मचारियों की मदद ली है, लेकिन हड़ताली कर्मचारी उन्हें काम करने से रोक रहे हैं। स्थिति को संभालने के लिए पटना में अब रात 10 बजे से लेकर सुबह 4 बजे के बीच पुलिस बल की भारी सुरक्षा में कचरे का उठाव कराया जा रहा है ताकि दिन में टकराव की स्थिति से बचा जा सके।

दरभंगा और बिहारशरीफ

दरभंगा में करीब 1,500 सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं, जिसके कारण पिछले तीन दिनों से शहर में लगभग 30 टन कचरा सड़ रहा है। सिंहवाड़ा नगर पंचायत में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लगभग 45 नाराज कर्मचारियों ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें लिखित रूप में पूरी नहीं होतीं, तब तक दफ्तर का ताला नहीं खुलेगा। वहीं, बिहारशरीफ (नालंदा) में बिहार लोकल बॉडीज इम्पलाइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले करीब 1,300 कर्मचारी नगर निगम के गेट के सामने धरने पर बैठे हैं, जिससे रोजाना उठने वाला 250 टन कचरा सड़कों पर ही सड़ रहा है।

प्रशासन का कड़ा रुख

बढ़ते संकट को देखते हुए पटना के नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी सफाई निरीक्षकों को सख्त आदेश दिए हैं कि हड़ताल के कारण सफाई व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए हर वार्ड में काम करने वाले सक्रिय सफाईकर्मियों के साथ 15 से 20 अतिरिक्त सहयोगियों की एक वैकल्पिक टीम बनाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि जो भी व्यक्ति सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश करेगा या वैकल्पिक कर्मचारियों को डराएगा-धमकाएगा, उसे तुरंत चिह्नित कर उसके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए।

नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सभी अंचल अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में रात के समय विशेष सफाई अभियान की खुद निगरानी करने को कहा है। हालांकि, कड़े रुख के साथ-साथ उन्होंने कर्मचारियों से काम पर लौटने की भावुक अपील भी की है। यशपाल मीणा का कहना है कि पटना नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाली यूनियन की सभी जायज मांगें पहले ही मान ली गई हैं और बाकी बची हुई मांगों को राज्य सरकार के पास विचार के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कर्मचारियों से जनहित को सर्वोपरि रखने की अपील की है ताकि शहर को महामारी की चपेट में आने से बचाया जा सके।

जनता पर भारी मार

इस पूरे प्रशासनिक और कर्मचारी विवाद में सबसे बुरी तरह बिहार की आम जनता पिस रही है। सुपौल से लेकर नालंदा तक, गलियों में सड़ते कचरे के कारण हवा में भारी बदबू फैल गई है। बरसात के इस मौसम में खुले में पड़ा कूड़ा मच्छरों और बैक्टीरिया के पनपने का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि यह हड़ताल एक-दो दिन और चली, तो अस्पतालों में डायरिया, टाइफाइड और डेंगू के मरीजों की बाढ़ आ जाएगी। प्रशासन को केवल बल प्रयोग करने के बजाय कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठकर इसका तुरंत कोई व्यावहारिक हल निकालना चाहिए।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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