ग्लासगो, अंग भारत। भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने शुक्रवार को राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि यशवीर सिंह ने अंतिम प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में दो पदक जीतकर डबल पोडियम हासिल किया। कड़े और रोमांचक मुकाबले में जहां भारत के नीरज चोपड़ा ने खराब मौसम के बीच भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा, वहीं पहली बार भाग ले रहे युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने आखिरी क्षणों में पासा पलट दिया। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पाथिराजे ने इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता, जबकि दुनिया भर के कई दिग्गज एथलीट इस मुकाबले में संघर्ष करते नजर आए।
नीरज का शानदार रजत
टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के लिए यह प्रतियोगिता आसान नहीं थी। ग्लासगो का ठंडा मौसम और तेज हवाएं जेवलिन थ्रोअर्स के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर रही थीं। ऐसी विषम परिस्थितियों के बावजूद नीरज ने अपनी तकनीक और अनुभव का बेहतरीन तालमेल दिखाया। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर का थ्रो फेंका, जो उनके इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (सीजन बेस्ट) है।
इससे पहले नीरज चोपड़ा का इस सत्र का सबसे बढ़िया प्रदर्शन 85.69 मीटर था, जो उन्होंने इसी साल जून में आयोजित दोहा डायमंड लीग में हासिल किया था। पिछले वर्ष सितंबर में नीरज को कमर में गंभीर चोट लगी थी, जिसके कारण वे लंबे समय तक मैदान से दूर रहे। इस बड़ी चोट से उबरने के बाद यह उनका दूसरा राष्ट्रमंडल खेल था। इससे पहले उन्होंने 2018 के गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
यशवीर का ऐतिहासिक थ्रो
इस प्रतियोगिता का सबसे बड़ा सरप्राइज और रोमांच भारत के 24 वर्षीय युवा एथलीट यशवीर सिंह ने पैदा किया। पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों के मंच पर उतरे यशवीर शुरुआत में थोड़े नर्वस दिखे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पहले पांच प्रयासों में वे पदक की दौड़ से पीछे चल रहे थे, लेकिन छठे और अंतिम प्रयास में उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
यशवीर सिंह ने अपने अंतिम थ्रो में 85.41 मीटर की दूरी तय कर कांस्य पदक पर कब्जा जमा लिया। यह थ्रो न केवल उन्हें पदक दिला गया, बल्कि यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (पर्सनल बेस्ट) भी बन गया। इससे पहले यशवीर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83.72 मीटर था। अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े टूर्नामेंट में इस तरह का दबाव झेलकर पोडियम तक पहुंचना भारतीय एथलेटिक्स के सुनहरे भविष्य की ओर इशारा करता है।
खेल का पूरा परिणाम
नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आप पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्पर्धा के अंतिम परिणाम और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को विस्तार से देख सकते हैं:
| स्थान | खिलाड़ी का नाम | देश | सर्वश्रेष्ठ थ्रो (मीटर) | पदक / स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| 1 | रुमेश थरंगा पाथिराजे | श्रीलंका | 89.75 मीटर | स्वर्ण पदक (Gold) |
| 2 | नीरज चोपड़ा | भारत | 85.83 मीटर | रजत पदक (Silver) |
| 3 | यशवीर सिंह | भारत | 85.41 मीटर | कांस्य पदक (Bronze) |
| 6 | केशॉर्न वालकॉट | त्रिनिदाद एवं टोबैगो | 82.55 मीटर | छठा स्थान |
| 7 | रोहित यादव | भारत | 81.56 मीटर | सातवां स्थान |
| – | अरशद नदीम | पाकिस्तान | 77.41 मीटर | तीन प्रयास के बाद बाहर |
श्रीलंकाई खिलाड़ी का स्वर्ण
श्रीलंका के रुमेश थरंगा पाथिराजे ने इस मुकाबले में अविश्वसनीय खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में ही 89.75 मीटर का एक बहुत बड़ा थ्रो फेंक दिया। ग्लासगो के ट्रैक पर चल रही ठंडी और तेज हवाओं के बीच भी वे जेवलिन को 90 मीटर के जादुई आंकड़े के बेहद करीब ले जाने में सफल रहे। रुमेश थरंगा पाथिराजे के इस दमदार थ्रो का जवाब प्रतियोगिता के अंत तक कोई भी खिलाड़ी नहीं दे पाया और उन्होंने आसानी से स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
दिग्गजों की चौंकाने वाली हार
इस मुकाबले में कई बड़े उलटफेर भी देखने को मिले। पाकिस्तान के स्टार खिलाड़ी, मौजूदा ओलंपिक चैंपियन और राष्ट्रमंडल खेलों के गत विजेता अरशद नदीम पूरी लय में नजर नहीं आए। वे शुरुआती तीन प्रयासों के बाद केवल 77.41 मीटर का ही थ्रो कर पाए और पदक की रेस से बाहर हो गए। अरशद का इतनी जल्दी बाहर होना पूरे खेल जगत के लिए बेहद चौंकाने वाला था।
इसके साथ ही, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के दिग्गज विश्व चैंपियन केशॉर्न वालकॉट भी अपनी पुरानी फॉर्म के लिए संघर्ष करते दिखे और 82.55 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ छठे स्थान पर रहे। भारत के तीसरे खिलाड़ी रोहित यादव ने भी इस कड़े मुकाबले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और 81.56 मीटर के थ्रो के साथ सातवां स्थान हासिल करने में सफल रहे।
दक्षिण एशिया का दबदबा
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों की इस विशेष स्पर्धा ने वैश्विक स्तर पर दक्षिण एशियाई एथलीटों की ताकत को प्रदर्शित किया है। पोडियम के तीनों पायदानों (स्वर्ण, रजत और कांस्य) पर पूरी तरह से एशियाई महाद्वीप के खिलाड़ियों का कब्जा रहा। एक दौर था जब जेवलिन थ्रो में यूरोप का एकछत्र राज होता था, लेकिन नीरज चोपड़ा के उदय के बाद से अब भारत और उसके पड़ोसी देशों ने इस खेल के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है।







