बेंगलुरु, अंग भारत। तमिलनाडु को 15 दिनों तक कावेरी नदी का पानी छोड़ने के कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के आदेश के बाद कर्नाटक में भारी आक्रोश है, जिसके कारण पूरे राज्य में किसान, कन्नड़ समर्थक संगठन और राजनीतिक दल सड़कों पर उतर आए हैं। यह विवाद एक बार फिर से दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों के बीच जल-साझाकरण के पुराने जख्मों को कुरेद रहा है।
आंदोलन का बढ़ता दायरा
वर्तमान में मंड्या जिले सहित कर्नाटक के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन उग्र हो चुका है। प्रदर्शनकारी केवल नारे नहीं लगा रहे, बल्कि वे अपनी मांगों को लेकर आक्रामक रुख अपना रहे हैं। विशेष रूप से श्रीरंगपट्टन तालुक के केआरएस (कृष्णराज सागर) क्षेत्र में किसानों ने बेंगलुरु-मैसूर राजमार्ग को जाम कर दिया है।
- सड़क पर लेटकर किया गया विरोध प्रदर्शन।
- अर्धनग्न होकर सरकार को चेतावनी।
- टायर जलाकर अपना गुस्सा जाहिर करना।
13 अगस्त का बंद
कन्नड़ आंदोलनकारी वाटल नागराज ने 13 अगस्त को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक राज्यव्यापी ‘कर्नाटक बंद’ का आह्वान किया है। इस बंद को व्यापक समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। वाटल नागराज के अनुसार, इस बंद के दौरान अस्पताल और एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं को पूरी तरह छूट दी जाएगी, लेकिन अन्य सभी व्यापारिक और परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी।
राजनीतिक घमासान
इस मुद्दे पर बीजेपी ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। केआरएस बांध की ओर कूच करने की कोशिश कर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरों में निम्नलिखित शामिल रहे:
| नाम | पद |
|---|---|
| बी.एस. येदियुरप्पा | पूर्व मुख्यमंत्री |
| आर. अशोक | विधानसभा में विपक्ष के नेता |
| चलवाड़ी नारायणस्वामी | विधान परिषद में विपक्ष के नेता |
| बी.वाई. विजयेंद्र | भाजपा प्रदेश अध्यक्ष |
फिल्म जगत का समर्थन
कावेरी विवाद अब केवल किसानों का मुद्दा नहीं रह गया है। कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष जयमाला ने स्पष्ट कर दिया है कि कन्नड़ फिल्म उद्योग राज्य की भूमि, जल और भाषा के सम्मान के लिए पूरी तरह से आंदोलन के साथ है। उन्होंने कहा कि जब राज्य के हितों की बात आती है, तो पूरा सिनेमा जगत एकजुट रहता है।
मुख्यमंत्री का पक्ष
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्थिति को संभालने के लिए कूटनीतिक रुख अपना रखा है। उन्होंने बंद को वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि इससे समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि जनता को ही परेशानी होगी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि राज्य सरकार ने सीडब्ल्यूआरसी की सिफारिश के खिलाफ पहले ही अपील कर दी है।
विधानसौधा में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने जानकारी दी कि रविवार को इस मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि राज्य के किसानों के हितों और पेयजल की उपलब्धता से समझौता नहीं किया जाएगा।
तमिलनाडु के सीएम का दौरा
एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम तब सामने आया जब वाटल नागराज ने धमकी दी कि यदि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय अपने कर्नाटक दौरे पर कावेरी मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाते हैं, तो हवाई अड्डे का घेराव किया जाएगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तमिलनाडु सरकार से सी. जोसेफ विजय का 3 अगस्त का दौरा स्थगित करने का आधिकारिक अनुरोध किया है।
कावेरी जल विवाद कर्नाटक के लिए भावनात्मक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से गंभीर है। पिछले कई दशकों से चला आ रहा यह विवाद हर बार मानसून के दौरान अपना विकराल रूप दिखा देता है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह एक तरफ सुप्रीम कोर्ट और सीडब्ल्यूएमए के आदेशों का पालन करे और दूसरी तरफ अपने राज्य के किसानों के आक्रोश को शांत करे। आगामी सर्वदलीय बैठक इस मामले का भविष्य तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।







