कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में ‘पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026’ के मसौदे को हरी झंडी दे दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लाना है। फिलहाल यह मसौदा उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति के पास गहन समीक्षा के लिए भेजा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि समिति की रिपोर्ट मिलते ही अगस्त माह में होने वाले विधानसभा सत्र में इसे आधिकारिक रूप से पेश किया जाए।
समिति की चार सप्ताह की समयसीमा
सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के लिए सरकार ने स्पष्ट समयसीमा तय की है। गठित उच्चस्तरीय समिति को आगामी चार सप्ताह के भीतर मसौदा विधेयक का बारीकी से परीक्षण करना होगा। इस दौरान समिति न केवल कानूनी पहलुओं की जांच करेगी, बल्कि प्रशासनिक ढांचे पर इसके प्रभाव का भी आकलन करेगी।
- विधेयक का कानूनी विश्लेषण और समीक्षा।
- मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों के साथ टकराव बिंदुओं की पहचान।
- आम जनमानस और हितधारकों के सुझावों को शामिल करना।
- अगस्त के विधानसभा सत्र के लिए अंतिम रिपोर्ट सौंपना।
जनजातीय समुदायों को छूट
एक अहम बात यह है कि राज्य सरकार ने आदिवासी और पारंपरिक समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी, मूल निवासी, कुर्मी और अन्य मान्यता प्राप्त जनजातीय समुदाय इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे। यह निर्णय उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल से प्रभावित है, जहाँ संवैधानिक अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए जनजातीय वर्गों को विशेष छूट दी गई है।
कानूनी एकरूपता के उद्देश्य
यूसीसी का मूल आधार समाज में व्याप्त असमानता को मिटाना है। अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ के कारण अक्सर कानूनी उलझनें पैदा होती हैं, खासकर महिलाओं के संपत्ति अधिकारों और भरण-पोषण के मामले में। प्रस्तावित कानून का लक्ष्य है:
- विवाह: एक समान विवाह पंजीकरण प्रणाली।
- तलाक: कानूनी प्रक्रिया को सरल और एकसमान बनाना।
- उत्तराधिकार: बेटा-बेटी और पति-पत्नी के बीच संपत्ति के अधिकारों में समानता।
- गोद लेना: एक एकल गोद लेने की प्रक्रिया का पालन।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व
यदि पश्चिम बंगाल में यह विधेयक सफलतापूर्वक पारित हो जाता है, तो यह देश का चौथा राज्य बन जाएगा जो UCC को पूरी तरह अपना चुका होगा। गुजरात, उत्तराखंड और असम पहले ही इस राह पर बढ़ चुके हैं। बंगाल का यह फैसला पूरे देश के लिए एक नजीर बन सकता है, क्योंकि यह राज्य अपनी विविध जनसांख्यिकी के लिए जाना जाता है।
अन्य प्रशासनिक निर्णय
मंत्रिमंडल की बैठक केवल UCC तक सीमित नहीं थी। सरकार ने राजस्व और सुरक्षा से जुड़े कई कड़े निर्णय भी लिए हैं:
| निर्णय का क्षेत्र | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| राजस्व नियंत्रण | बालू और पत्थर खनन में पारदर्शिता लाना। |
| न्यायिक सुधार | 9 जिलों में 9 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन। |
| सीमा सुरक्षा | BSF और SSB को भूमि हस्तांतरण की मंजूरी। |
अगस्त का विधानसभा सत्र बंगाल की राजनीति और सामाजिक ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। उम्मीद है कि सदन के भीतर इस कानून के हर एक पहलू पर विस्तृत चर्चा होगी, ताकि जनता के बीच कोई संशय न रहे। सरकार का जोर इस बात पर है कि विकास और अनुशासन के साथ-साथ राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी बना रहे।








