नई दिल्ली,अंग भारत। बिहार की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर एक अहम घटनाक्रम के तहत नीतीश कुमार और राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली।संसद भवन में आयोजित इस औपचारिक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दोनों नेताओं को शपथ दिलाई। यह समारोह राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे संसद में अनुभवी नेतृत्व की भूमिका और मजबूत होगी।
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कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान केंद्र सरकार और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
हरिवंश को फिर मिला मौका
69 वर्षीय हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था। इसके बाद द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें एक बार फिर राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उनके पुनर्नियुक्ति को उनके अनुभव और संसदीय योगदान की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
खाली सीट पर हुआ मनोनयन
दरअसल, राज्यसभा की एक सीट रंजन गोगोई का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई थी। इसी रिक्त सीट पर हरिवंश को मनोनीत किया गया है।
राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों की भूमिका
राज्यसभा में कुल 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। इन सदस्यों का चयन कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर किया जाता है।
नीतीश कुमार की नई भूमिका
नीतीश कुमार का राज्यसभा में आना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव से सदन की कार्यवाही को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बढ़ेगा संसदीय अनुभव का दायरा
विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार और हरिवंश जैसे अनुभवी नेताओं की मौजूदगी संसद में बहस और नीतिगत चर्चाओं को और समृद्ध बनाएगी।
राष्ट्रीय राजनीति में असर
इस घटनाक्रम का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव बिहार की राजनीति और राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।









