पटना, अंग भारत। बिहार के खनन एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 3,592 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व राजस्व अर्जित करके राज्य के आर्थिक इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और खनन मंत्री विजय सिन्हा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विभाग की कार्यप्रणाली में किया गया व्यापक बदलाव है। 21 जिलों ने निर्धारित राजस्व लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त कर इस उपलब्धि को संभव बनाया है, जो राज्य में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण और पारदर्शिता को दर्शाता है।
बदली कार्यप्रणाली
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के अनुसार, खनन विभाग पहले बाहुबलियों के प्रभाव और अनियमितताओं के लिए जाना जाता था। हालांकि, अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। विभाग ने ‘भय मुक्त’ वातावरण तैयार कर ‘राजस्व आधारित प्रणाली’ को प्राथमिकता दी है। वर्तमान में राज्यभर में 473 बालू घाट पूरी तरह से संचालित किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था ने न केवल विभाग की आय बढ़ाई है, बल्कि आम लोगों में भी यह संदेश गया है कि सरकारी खजाने की चोरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
घाटे पर लगाम
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। विभाग को 600 करोड़ रुपये का नुकसान तब उठाना पड़ा जब 78 घाट संचालकों ने अपने अनुबंध बीच में ही समर्पित कर दिए। विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया कि इन संचालकों ने गलत नीयत से, अत्यधिक बोली लगाकर घाट तो ले लिए थे, लेकिन सरकार की सख्ती के आगे उनकी अवैध कमाई की योजनाएं फेल हो गईं।
- अवैध खनन करने वाले संचालकों पर सख्त कार्रवाई।
- अर्ध-समर्पित घाटों के कारण 600 करोड़ का राजस्व नुकसान।
- भविष्य की टेंडर प्रक्रियाओं से इन संचालकों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
डिजिटल सुधार
भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग ने पूरी तरह तकनीक का सहारा लिया है। मैन्युअल चालान की जगह अब ई-चालान सॉफ्टवेयर अनिवार्य है। लाइसेंसिंग से लेकर बालू घाटों की निगरानी तक, सबकुछ ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दिया गया है। इससे बिचौलियों का खेल लगभग समाप्त हो चुका है और काम में जवाबदेही आई है।
बिहारी योद्धा पुरस्कार
अवैध खनन के खिलाफ लड़ाई में सरकार ने जनता को भी अपना साझीदार बनाया है। ‘बिहारी योद्धा पुरस्कार’ इसी कड़ी का एक हिस्सा है। अब तक 96 ऐसे सतर्क नागरिकों को सम्मानित किया जा चुका है, जिन्होंने अवैध खनन की सटीक सूचना प्रशासन तक पहुंचाई। यह योजना स्थानीय लोगों को जागरूक करने और माफियाओं पर लगाम लगाने का एक कारगर हथियार साबित हो रही है।
आगामी निवेश
खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार नई नीलामी नीतियों पर काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल बालू तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संपदा के अन्य स्रोतों को भी खंगाला जा रहा है।
| परियोजना | स्थान | स्थिति |
|---|---|---|
| तीन खनिज ब्लॉक | रोहतास | नीलामी प्रक्रिया जारी (अंतिम तिथि 25 मई) |
| कॉपर, लेड, जिंक | बांका | नीलामी प्रस्तावित |
ट्रांजिट पास
दूसरे राज्यों से बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले खनिज वाहनों के लिए अब ‘ट्रांजिट पास’ अनिवार्य कर दिया गया है। विजय सिन्हा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई वाहन बिना ट्रांजिट पास के पकड़ा जाता है, तो उस पर नियमों के अनुसार 25 गुना तक भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम पड़ोसी राज्यों से होने वाले अवैध परिवहन को रोकने के लिए उठाया गया है।
पत्थर खनन नीति
राज्य में पत्थर खनन को लेकर भी सरकार अब एक नई और पारदर्शी नीति पर काम कर रही है। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जानकारी दी कि पूरे राज्य में 30 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां व्यवस्थित तरीके से खनन कार्य शुरू किया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए जल्द ही नई दिशा-निर्देशों की घोषणा की जाएगी, जिससे खनन व्यवसाय को सुव्यवस्थित किया जा सके।
विजय सिन्हा का कहना है कि “हमारा लक्ष्य बिहार को एक आदर्श खनन मॉडल बनाना है, जहाँ प्राकृतिक संसाधनों का दोहन राज्य के विकास के लिए हो, न कि माफियाओं की तिजोरी भरने के लिए।”








